नगर निगम में बिजली और सफाई उपकरण खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस और भाजपा का हाई बोल्टेज ड्रामा शाम तक चला। कांग्रेस पार्षदों के विरोध के चलते नगर निगम में होने वाला 1.50 करोड़ रुपए का टेंडर मुख्य कोषाधिकारी और एमएनए ने निरस्त कर दिया गया। अब एक सप्ताह के भीतर ही टेंडर दोबारा कराया जाएगा। इधर, टेंडर प्रक्रिया में मेयर और एमएनए पर अनियमितता का आरोप लगाते कांग्रेस के पार्षदों ने धरना भी दिया। इसी मामले में भाजपा पार्षदों ने जनहित में आज ही टेंडर जारी करने का ज्ञापन मुख्य कोषाधिकारी को सौंपा।
नगर निगम में बिजली और सफाई उपकरण खरीदने के लिए नगर निगम की तरफ से 19 जनवरी को टेंडर बुलाए गए थे। निविदा खरीद के लिए तीन फरवरी तक का समय था। चार फरवरी को निविदा जमा करने की अंतिम तिथि थी। लेकिन नगर निगम ने पांच जनवरी को एक नोटिस जारी कर इसी दिन निविदा खरीद और छह को निविदा जमा करने की सूचना दी। शुक्रवार को नगर निगम में मुख्य कोषाधिकारी तृप्ति श्रीवास्तव, एमएनए तीरथपाल सिंह व मेयर के समक्ष निविदाएं खोली जानी थी। इसकी जानकारी होने पर कांग्रेसी पार्षद निगम कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने मौके पर हंगामा कर धरना शुरू कर दिया।
आरोप लगाया कि निगम की तरफ से चहेतों को ठेका देने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई है। इधर, भाजपा के 11 पार्षदों ने टेंडर प्रक्रिया को जनहित में जरुरी बताते हुए एमएनए को ज्ञापन सौंपा। इस बीच मुख्य कोषाधिकारी और एमएनए ने टेंडर बाक्स को चेक किया। टेंडर एक लिफाफे में बाहर पड़ा होने के कारण मुख्य कोषाधिकारी और एमएनए ने ठेका निविदा निरस्त कर दिया। इसे एक सप्ताह के भीतर दोबारा बुलाया जाएगा। मुख्य नगर अधिकारी तीरथ पाल सिंह ने बताया कि बीच में अवकाश होने के कारण टेंडर प्रक्रिया के लिए एक दिन का समय दिया गया था। विरोध करने वालों में ललित मिगलानी, वाहिद खां, कालीचरण, सुमित छाबड़ा, सोनू अनेजा, मोनू निषाद, गौरव खुराना आदि मौजूद थे।