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Udham Singh Nagar News: वसूली न होने से सहकारी समितियों के कारोबार पर संकट

Sun, 31 May 2026 12:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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काशीपुर। ऋण वसूली न हो पाने से जिले में सहकारी समितियों के कारोबार पर संकट है। वित्तीय असंतुलन के चलते ये समितियां अपने नियमित सदस्यों को भी अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही हैं। कई समितियों में वर्षों से वार्षिक आम सभा नहीं होने से सदस्यों को न तो लाभांश मिल पाया है और न ही जमा अंश पूजी पर ब्याज। बैलेंस सीट खराब होने से कुछ समितियां खाद व कीटनाशक आदि की आपूर्ति भी नहीं कर पा रही हैं।
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जिले में इस समय 35 सहकारी समितियां हैं। तमाम किसान इन समितियों की करीब 150 करोड़ की रकम दबाए बैठें हैं। ऋण वापस न होने से समितियों पर बैंकों के ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा है। समितियां बैंकों से चार फीसदी ब्याज की दर से कर्ज उठाती हैं और आगे सात फीसदी की दर पर किसानों को ऋण देती हैं। इसके अलावा समितियां खाद, दवाइयों व कीटनाशक भी किसानों को ऋण पर उपलब्ध कराती हैं। इसके लिए समितियों की कोऑरपेटिव बैंक में सीसीएल लिमिट होती हैं।
एक ट्रक एनपीके मंगाने के लिए समिति को आठ लाख रुपये व एक ट्रक यूरिया के लिए करीब एक लाख रुपये एडवांस देने पड़ते हैं। ऋण वितरण और वसूली में असंतुलन की स्थिति से लिमिट भी प्रभावित हो रही है। इसका असर जरूरी चीजों की आपूर्ति पर पड़ रहा है। इसका खामियाजा नियमित सदस्यों को भुगतना पड़ रहा है। जो समितियां ज्यादा घाटे की स्थिति में हैं, वहां वार्षिक आम सभाएं तक नहीं हो रही हैं। जिससे किसानों के हित में कोई नई योजना नहीं बन पा रही है। सदस्य किसानों की लिमिट भी कम कर दी गई है। पहले सदस्य किसानों की खाद की लिमिट 65 हजार रुपये तक थी, जो अब घटकर 30 हजार तक रह गई है। लिमिट से इतर नियमित सदस्यों को भी खाद और बीज नगद खरीदना पड़ रहा है।
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373.74 करोड़ के सापेक्ष जमा हुए 237.74 करोड़
वर्ष 2025 में जिले में 35 सहकारी समितियों को बैंकों ने 373.74 करोड़ रुपये का ऋण दिया है। जिसमें से 237.91 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। वसूली में खटीमा की उत्तरी खटीमा सहकारी समिति पहले पायदान पर हैं। समिति का वसूली प्रतिशत 91 रहा है। हालांकि पिछले वर्ष यह 92 फीसदी था। निचले पायदान पर रुद्रपुर की गंगापुर समिति है। वहां जमा की प्रतशित महज 28 प्रतिशत है। जो पिछले वर्ष की तुलना में यह चार फीसदी तक कम है। काशीपुर स्थित कुंडेश्वरी समिति की स्थिति भी बहुत खराब है। यहां वसूली महज 35 प्रतिशत है।

वसूली के लिए नही हो सका धारा 95 क का अनुपालन



समितियों का ऋण वसूली में पिछड़ने का कारण सहकारी अधिनियम की धारा 95 के का पालन नहीं होना है। दरअसल, इसके लिए विभाग को जिलाधिकारी के माध्यम से खाता खुलवाना होता है। मांग के मुताबिक वसूली के लिए डीएम कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाता है।



जिले की सभी समितियों को अभियान चलाकर वसूली तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर वसूली कार्यो की समीक्षा की जाती है। जरुरत पड़ी तो वसूली में तहसील प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा। - हरीश चंद्र खंडूडी, सहायक निबंधक सहकारिता
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