गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की सेवा में लगे 13 सेवादारों को निकालने के बाद फिर से रखने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कमेटी के प्रधान की ओर से बैठक में निकाले गए 13 सेवादारों को दोबारा रखने का कोई प्रस्ताव पारित न होने की बात कही। कमेटी के उपप्रधान ने प्रधान पर दबाव के चलते बैठक में हुई सहमति से इनकार कर रोष व्यक्त किया।
कमेटी के प्रधान सेवा सिंह और महासचिव प्रीतम सिंह संधू कमेटी के सचिव केहर सिंह सहित नौ मेंबर कमेटी ने सात जुलाई को गुरुद्वारे के प्रबंधक रणजीत सिंह को प्रबंधक पद से हटाते हुए चोमेला फॉर्म का मैनेजर बनाने तथा मलकीत सिंह को प्रबंधक पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। गुरुद्वारा साहिब में सेवा कर रहे 13 सेवादारों को भी पद से हटा दिया गया था।
विवाद बढ़ने पर एसडीएम निर्मला बिष्ट ने 14 जुलाई को गुरुद्वारे के सभी सदस्यों के साथ बैठक की। इसमें रणजीत सिंह को प्रबंधक पद पर बनाए रखने तथा महाप्रबंधक पद पर अमरजीत सिंह की नियुक्ति का प्रस्ताव पारित हुआ था। सोमवार को गुरुद्वारे के प्रधान सेवा सिंह ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि 13 मेंबर को रखने का न तो पूर्व में कोई प्रस्ताव पारित हुआ था और ना ही 14 तारीख को हुई बैठक में ही प्रस्ताव पारित किया गया। कहा कि उक्त सेवादार सही से कार्य नहीं कर रहे थे, जिस कारण उन्हें हटा दिया गया है।
इधर, गुरुद्वारा कमेटी के वर्तमान में उपप्रधान जसविंदर गिल ने जारी विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि प्रधान बैठक में लिए गए निर्णय के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। 28 मेंबरों की बैठक में सर्वसम्मति से 13 सेवादारों को बहाल करने का भी प्रस्ताव लिया गया था। आरोप लगाया कि प्रधान कुछ पदाधिकारियों के दबाव में बैठक में लिए गए निर्णय से मुकर रहे हैं, जिससे नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारे का माहौल अशांत हो रहा है। कहा है कि प्रधान यदि अपने पद की जिम्मेदारी को नहीं निभा पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।