आवास विकास शिव मंदिर के पास स्थित सस्ता गल्ले की दुकान में उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। उपभोक्ताओं का आरोप था कि सस्ता गल्ला विक्रेता महीने के अंतिम समय में राशन बांट रहे हैं। इससे कई उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल पाता है। हंगामे को देखते हुए पुलिस और पूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसी तरह भीड़ को शांत किया।
शुक्रवार को राशन बंटने की सूचना पर उपभोक्ताओं की लाइन लग गई, लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी जब दुकान नहीं खुली तो उपभोक्ताओं ने हंगामा करना शुरू कर दिया। उपभोक्ताओं का आरोप था कि सस्ता गल्ला विक्रेता महीने के अंतिम तीन दिन दुकान खोलता है। इसी दिन राशन बांटा जाता है। इससे कई उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिल पाता है। साथ ही आरोप लगाया कि उनके कार्डों की जांच की जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी। कहा कि विक्रेता उनके हिस्से का राशन ब्लैक में बेच रहा है। हंगामे की सूचना पर पूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उपभोक्ताओं ने उन पर भी मिलीभगत का आरोप लगा दिया। हंगामा बढ़ता देख पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पहुंचकर किसी तरह मामले को शांत किया।
जांच की बात कहकर झाड़ा पल्ला
जब डीएसओ श्याम आर्या से पूछा गया तो उन्होंने हंगामे की बात स्वीकारते हुए लोगों की ओर से लगाए आरोपों की जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। साथ ही कहा कि जब गोदाम में समय से राशन नहीं मिलेगा तो बांटा कैसे जाएगा।
आखिर अंतिम समय में ही क्यों बाटा जाता है राशन
सस्ते गल्ले की अधिकांश दुकानों में महीने के अंतिम दिन राशन बांटा जाता है, जबकि संभागीय खाद्य नियंत्रक ललित मोहन रयाल की ओर से सभी डीएसओ को लिखित आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में कहा गया है कि महीने के दूसरे सप्ताह से राशन बांटा जाए। इसके बाद भी अधिकारी समय से राशन का उठान नहीं कर रहे हैं। इससे पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली में भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।
-