रुद्रपुर। फुलसुंगा में स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद कुमाऊं के पहले मानसिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निर्माण शुरू हो गया है। तीन बीघा जमीन पर चार करोड़ की लागत से पेयजल संसाधन एवं निर्माण इकाई केंद्र का निर्माण कर रही है।
फुलसुंगा में लंबे वर्षों से खाली पड़ी सरकार की तीन बीघा जमीन पर आसपास के लोग गाय-भैंस बांधते थे। कुछ दिन पूर्व निर्माण कार्य शुरू होने से पहले लोगों ने खाली भूमि को लेकर विरोध जताया था। तीन घंटे तक चले विवाद के बाद जैसे-तैसे समाज कल्याण अधिकारी ने लोगों को समझाया कि पुनर्वास केंद्र के निर्माण के लिए सरकार की ओर से भूमि दी गई है। उसके बाद लोगों ने भवन का निर्माण कार्य होने दिया।
बता दें कि, कुमाऊं में बौद्धिक अक्षमता या मानसिक दिव्यांगता से ग्रसित लोगों को एम्स दिल्ली व ऋषिकेश, बरेली और लखनऊ के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में समाज कल्याण विभाग की ओर से फुलसुंगा में एमडीआरसी बनाया जा रहा है। दो मंजिला एमडीआरसी बनने के बाद यहां डिस्पेंसरी की भी सुविधा दी जाएगी और मानसिक दिव्यांगों के निशुल्क इलाज, आवास, भोजन आदि की व्यवस्था की जाएगी। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह के बाद मानसिक दिव्यांगों को पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरुद्ध ने बताया कि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है।