कांग्रेस में काफी मंथन के बाद आखिरकार जसपुर सीट पर भाजपा से बगावत कर कांग्रेस में आए आदेश चौहान को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे आदेश को टिकट देकर कांग्रेेस ने बड़ा सियासी दांव खेला है। कांग्रेस ने आदेश को उतारकर भाजपा, बसपा के दावेदारों के सामने मुश्किलें खड़ी कर सियासी समीकरणों को उलझा दिया है। कांग्रेस ने डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल को प्रत्याशी बनाने वाली भाजपा को उसी के अंदाज में जवाब दिया है।
वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में आदेश चौहान को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया था। आदेश 21,604 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। आदेश इस चुनाव में खुद को भाजपा का प्रत्याशी मानकर काफी समय से तैयारियों में जुटे थे। लेकिन पिछले साल अचानक कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल ने उनकी राह का रोड़ा बन गए। आदेश को जब टिकट के लिए पार्टी हाईकमान से निराशा हाथ लगी तो उन्होंने कुछ महीने पहले कांग्रेस का दामन थाम लिया था। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें टिकट देने का भरोसा जताया था। इसके बाद से ही वह तैयारियों में जुटे थे।
बीते आठ दिसंबर को काशीपुर में हुई कांग्रेस की सतत विकास संकल्प यात्रा में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आदेश को विशेष तरजीह देकर इरादे जता दिए थे, लेकिन दावेदारों की लंबी फौज ने कांग्रेस हाईकमान को चिंता में डाल दिया था। पार्टी की कोशिश थी कि प्रत्याशी घोषित होने के बाद बगावत भी न हो और भाजपा प्रत्याशी के सामने मजबूत चेहरा लाया जा सके। काफी मंथन और जातिगत समीकरणों का ख्याल रखते हुए आदेश कांग्रेस का भरोसा जीतने में सफल हुए। भाजपा ने कांग्रेस के बागी को प्रत्याशी बनाया तो जवाब में कांग्रेस ने भी भाजपा के बागी को मैदान में उतार दिया। देखने वाली बात यह होगी कि आदेश को टिकट मिलने के बाद बाकी दावेदार उन्हें पचा लेते हैं या फिर बगावत का झंडा बुलंद करते हैं।
फोटो 24केएसपी 17पी: आदेश चौहान