एनएच-74 के लिए भूमि अधिग्रहण के नाम पर बांटे गए मुआवजे में अफसरों की मनमानी लगातार उजागर हो रही है। अब जसपुर तहसील के कुंडा क्षेत्र में एक ऐसा मामला पकड़ में आया है, जिसमें 2.54 करोड़ रुपये की जमीन का मुआवजा 23 करोड़ रुपये दिया गया। मुआवजा घोटाला खुला तो संबंधित अफसर-कर्मियों ने फाइल भी नष्ट कर दी। अब एसआईटी जमीन के पुराने कागजात की पड़ताल के साथ ही किसान के खाते खंगाल रही है।
घोटाले की परत दर परत जांच में जुटी एसआईटी के सामने चौंकाने वाले तथ्य लगातार उजागर हो रहे हैं। अफसरों और कर्मचारियों ने मुआवजे की मोटी रकम में कमीशन पाने के लालच में कई फर्जी दस्तावेज तैयार कर काश्तकारों को मुआवजा निर्धारण कर दिया। जसपुर तहसील के कुंडा गांव में छह एकड़ जमीन वर्ष-2014 में कृषि भूमि में दर्ज थी, लेकिन जब एनएच के लिए भूमि अधिग्रहण का दौर चला तो तत्कालीन अफसरों ने 2016 में उसी भूमि की प्रकृति अकृषि दर्शाकर 23 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान करने का आदेश दे दिया, जबकि कृषि दर से उक्त भूमि का मुआवजा 2.54 करोड़ बनता। भूमि का मुआवजा पांच किसान भाइयों को दिया गया। उनके बैंक खातों की डिटेल से एसआईटी ने इस बात के प्रमाण भी जुटाए हैं कि मुआवजा मिलने के बाद काश्तकारों ने कमीशन के रूप में तीन करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान दो अन्य लोगों को किया है। आरोप है कि इस प्रकरण की पत्रावलियों को भी तत्कालीन पेशकार ने नष्ट कर दिया।
संग्रह अमीन और पेशकार के चालक से पूछताछ
रुद्रपुर। एनएच-74 भूमि मुआवजे घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने अब जुटाए गए साक्ष्यों को और पुख्ता करने के लिए काश्तकारों और सरकारी अधिकारियों के साथ ही मामले में संदिग्ध अन्य लोगों को भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है। इसी के चलते बुधवार को एसआईटी ने घोटाले से संबंधित 143 की पत्रावलियों को जलाने वाले काशीपुर के पूर्व पेशकार के चालक से भी पूछताछ की। साथ ही काशीपुर के एक पूर्व संग्रह अमीन के हस्ताक्षरों का मिलान भी एसआईटी द्वारा किया गया। बताया जा रहा है कि दोनों से पूछताछ में एसआईटी को कुछ और अहम जानकारियां मिली हैं।