दिनेशपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत मकानों की धनराशि न मिलने से गुस्साए वार्ड तीन के लोगों ने सोमवार को नगर पंचायत में धरना दे दिया। ईओ के कार्यालय न आने के कारण प्रदर्शनकारियों ने ईओ के साथ अन्य लिपिकों के कार्यालय के दरवाजे भी बंद कर दिए।
इस दौरान विरोध करने पर लोगों ने एक लिपिक की पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पीएचसी में उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस और चेयरमैन ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। घायल लिपिक ने वार्ड सभासद और उसकी पत्नी समेत कई लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। उधर, सभासद की ओर से भी लिपिक के खिलाफ तहरीर दी गई है।
वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर के सात वार्डों में 1180 मकान स्वीकृत हुए थे। पहले चरण में विभिन्न वार्डो में 510 मकान आवंटित कर दिए गए। शासन ने नगर पंचायत को 4.08 करोड़ का बजट जारी किया। 491 लाभर्थियों को सर्वे के बाद पहली किस्त के रूप में 20-20 हजार और 219 लोगों को दूसरी किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये बांटे गये।
इस बीच एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट के 2013 के आदेश का हवाला देते हुए विभिन्न वार्डो में नदी किनारे 200 मीटर के दायरे में स्वीकृत मकानों का आवंटन अवैध बताते हुए जांच की मांग कर दी। ईओ ने प्रधान लिपिक प्रकाश रंजन को इसके जांच के आदेश दिये।
जांच में नगर में 112 स्वीकृत मकान हाईकोर्ट के निर्देशानुसार अवैध पाये गये, जिनमें सर्वाधिक वार्ड तीन में 97 लोग अपात्र की श्रेणी में पाए गए। वार्ड में 122 लोगों के मकान स्वीकृत हुए थे। सभी को पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये मिल गए थे। उन्होंने अगली किस्त शीघ्र आने की आस में कर्जा लेकर एक लाख से अधिक रुपये निमार्ण कार्य में खर्च कर दिये।
उधर, सर्वे रिर्पोट आने के बाद ईओ फईम खां ने अपात्र लोगों के चेकों पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, जिससे अपनी झोपड़ी तोड़कर खुले आसमान के नीचे अपने बच्चों के साथ रह रहे गरीबों के पैर तले जमीन खिसक गई। डेढ़ माह से दर-दर की ठोकरें खाने के बाद सोमवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
सभासद झारना मालाकार और नामित सभासद प्रशांत मालाकार के नेतृत्व में समस्त वार्डवासी नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गये और ईओ के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि जब वे पात्र नहीं थे तो सर्वे में उन्हें शामिल क्यों किया गया और 20 हजार रुपये की किस्त क्यों दी।
उन्होंने खुद अपने मकान ध्वस्त कर दिए। अब वे क्या करें। काफी देर इंतजार के बाद ईओ के कार्यालय नहीं आने की बात सुनकर लोगों का पारा चढ़ गया। उन्होंने ईओ के साथ सभी लिपिकों के कक्षों के दरवाजे बंद कर दिये। आक्रोशित लोग लाइसेंस लिपिक राजवीर सिंह वाल्मीकि के कार्यालय में पहुंचकर हंगामा करने लगे।
राजवीर सिंह का आरोप है कि विरोध करने पर लोगों ने उन पर हमला बोल दिया और खींचकर बाहर ले आये। उन्हें बुरी तरह पीटा गया। कुछ लोगों ने बमुश्किल हमलावरों से छुड़ाया। इस बीच थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज रतूड़ी और चेयरमैन काबल सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। हमले में लिपिक राजवीर को काफी चोटे आई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
दिनेशपुर। लिपिक राजवीर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने वार्ड तीन की सभासद झरना मालाकार और उसके पति प्रशांत मलाकार सहित दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम सहित मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रभारी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर मनोज रतूड़ी ने बताया केस दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। फुटेज के आधार पर घटना में शामिल लोगों को चिन्हित कर उन्हें भी नामजद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभासद और अन्य महिलाओं की ओर से भी लिपिक के खिलाफ तहरीर दी गई है, जिसकी जांच की जा रही है।
दिनेशपुर। चेयरमैन काबल सिंह ने सोमवार को नगर पंचायत कार्यालय में हुए घटनाक्रम की निंदा की। कहा वह गरीबों के साथ हैं, लेकिन जनता को भी संयम से काम लेना चाहिए। कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। उनका कहना था कि वह समय रहते नगर पंचायत कार्यालय पहुंच जाते तो शायद ऐसा नहीं होता।
दिनेशपुर। नगर पंचायत की लापरवाही से वार्ड तीन में 97 परिवार सहित नगर में 112 परिवार अब फुटपाथ पर आ गये है। हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में आदेश जारी कर समूचे प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में नदी के 200 मीटर के दायरे में पक्के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था। आदेश सभी निकायों को जारी किया था, मगर नगर में स्वीकृत मकानों के सर्वे के दौरान ईओ व किसी भी कर्मचारी ने इस आदेश की तरफ ध्यान नहीं दिया।
सभासदों की संस्तुति पर किस्त दे दी गई। अब इसका खमियाजा गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है। महज 20 हजार की रकम पाने के बाद अपनी झोपड़ी और टिनशेड के मकान तोड़कर लोगों ने इधर-उधर से कर्जा लेकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। लोग अपने बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे इस उम्मीद से रह रहे थे कि उनका अपना पक्का घर होगा।
मगर नगर पंचायत की लापरवाही से 112 परिवार अब बर्बादी के कगार पर हैं। सूत्रों के अनुसार, अब इन लोगों को योजना का लाभ मिलना मुश्किल है, ऊपर से रिकवरी का खतरा भी मंडरा रहा है। वहीं सर्वे के दौरान इन मकानों की संस्तुति देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लापरवाही की गाज गिर सकती है।