तीन साल से बंद चीनीमिल को पीपीपी मोड पर चलाने के लिए शासन ने कवायद तेज कर दी है। शासन से सत्र 2021-22 में मिल को चालू कर दिया जाएगा। इसके लिए आगामी जनवरी में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
साल 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दि किसान सहकारी चीनीमिल को करोड़ों के घाटे में देख पीपीपी मोड पर चलाने के लिए मिल को बंद कर दिया था। इसका असर सीधे गन्ने की खेती पर पड़ा था और किसानों ने गन्ने का रकबा कम कर दिया था। किसान चीनीमिल को तत्काल चालू करने की मांग करते आ रहे थे।
मामले में विधायक सौरभ बहुगुणा ने गन्ना एवं चीनी के प्रबंध निदेशक चंद्रेश यादव से चीनीमिल संचालन को लेकर वार्ता की। विधायक ने बताया कि शासन की ओर से आगामी सत्र 2021-22 में चीनीमिल को पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा। शासन ने नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट से मिल संचालन के लिए प्री-फिजीबिलिटी रिपोर्ट मांगी थी, जो 13 दिसंबर तक शासन को जानी थी लेकिन कोरोना के कारण इंस्टीट्यूट की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजी गई।
बताया कि दिसंबर के तीसरे सप्ताह में इंस्टीट्यूट शासन को प्री फिजीबिलिटी रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद नियोजन विभाग से स्वीकृति मिलेगी और फिर जनवरी में चीनी मिल को पीपीपी मोड पर देने के लिए टेंडर निकाल दिए जाएंगे। किसान नेता लक्खा सिंह ने विधायक सौरभ बहुगुणा का आभार जताया। कहा कि इससे क्षेत्र के किसानों को अगले सत्र में बाहरी चीनीमिलों को गन्ना नहीं देना पड़ेगा और न ही परेशानी उठानी पड़ेंगी।