रुद्रपुर। जिले में महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। जिले के अधिकांश सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञों के न होने के कारण गर्भवती महिलाओं का प्रसव एलएमओ (लेडी मेडिकल ऑफिसर) की देखदेख में हो रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में वर्तमान में दो महिला रोग विशेषज्ञ व चार एलएमओ तैनात हैं जबकि यहां प्रतिमाह औसतन 300 प्रसव हो रहे हैं। इसी तरह काशीपुर उप जिला अस्पताल और खटीमा उप जिला अस्पताल में सिर्फ एक-एक महिला रोग विशेषज्ञ हैं। वहीं जिला मुख्यालय के ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाले सीएचसी किच्छा में महिला रोग विशेषज्ञ न होने के कारण महिलाओं के प्रसव के लिए ऑन कॉल डॉक्टर की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा सितारगंज, नानकमत्ता, बाजपुर, गदरपुर और जसपुर सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। इन सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव एलएमओ व नर्सिंग ऑफिसर की देखरेख में होता है। जिले में पिछले दो माह में प्रसव के दौरान दो गर्भवतियों की मौत हो चुकी है।
सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण अधिकांश महिलाएं प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती हो रही हैं लेकिन वहां डिलीवरी के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हो रही है। बता दें कि पिछले वर्ष जिले में 30,900 शिशुओं का जन्म हुआ था। इनमें से प्रसव के दौरान 24 महिलाओं की मौत हो गई थी।
जिला अस्पताल समेत सभी उप जिला अस्पतालों व सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ की कमी है। इन अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा गया है। शीघ्र ही नियुक्ति की संभावना है। - डॉ. हरेंद्र मलिक, प्रभारी सीएमओ।