सरकार से एसओपी जारी होते ही प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है लेकिन जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के खुलने में 1.83 करोड़ रुपये का पेच फंस गया है। विवि प्रशासन का तर्क है कि महामारी में प्रयोग किए गए छात्रावासों में रिनोवेशन कराए बिना छात्रों को नहीं रखा जा सकता। इसके लिए शासन से बजट मांगा गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि तीन माह पूर्व ही मौखिक आदेश पर सभी छात्रावास अवमुक्त कर दिए थे।
कोरोना काल में 24 मार्च से देश में लगे लॉकडाउन के बाद सभी शिक्षण संस्थानों सहित पंतनगर विवि को भी बंद कर दिया गया था। इसके बाद छात्रों को अपना सामान छात्रावासों में ही छोड़कर अपने घरों को लौटना पड़ा था। जिला प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर विवि के 13 छात्रावासों को क्वारंटीन और कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए अधिग्रहीत कर लिया था।
इनके रखरखाव एवं कर्मियों की सेवाओं के लिए शासन से विवि को कुछ धनराशि भी दी जा चुकी है। विवि प्रशासन ने इन छात्रावासों की मरम्मत और रंगरोगन के लिए आपदा प्रबंधन मद में शासन को 1.83 करोड़ रुपये का एस्टीमेट भेजा है। पेच यह है कि यदि जिला प्रशासन छात्रावासों का अधिग्रहण छोड़ने का डिनोटिफिकेशन (लिखित आदेश) करता है तो विवि को 1.83 करोड़ रुपये मिलने में कठिनाई होगी। अब जब तक विवि को बजट नहीं मिलता और छात्रावासों का रिनोवेशन नहीं होगा, तब तक विवि में छात्र नहीं आएंगे।
सूनी पड़ीं कक्षाएं और छात्रावासों में लटके रहे ताले
पंतनगर। दस माह बाद भी मंगलवार को पंतनगर विवि की कक्षाएं सूनी रहीं और छात्रावासों में ताले लटके थे। कोरोना का डर और साल का अंत होने के चलते जहां विवि के शिक्षक और कर्मियों की उपस्थिति कम रही, वहीं कोरोना काल में ठप कारोबार से उबरने के लिए परिसर के व्यवसायी और रिक्शे वाले छात्रों की बाट जोहते दिखाई दिए। परिसर में विवि में छात्रों के आने को लेकर चर्चाएं रहीं।
जिला प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर विवि के 13 छात्रावासों का अधिग्रहण किया था। जब तक डिनोटिफिकेशन न हो और छात्रावासों का रिनोवेशन न करा दिया जाए, तब तक छात्रों को बुलाना उचित नहीं है। शासन से बजट अवमुक्त होते ही छात्रावासों का रिनोवेशन होने के बाद छात्रों का पठन-पाठन शुरू किया जाएगा। - डॉ. बृजेश सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंतनगर विवि।
कोरोना काल में विवि के छात्रावासों का अधिग्रहण किया गया था, जिन्हें तीन माह पूर्व अवमुक्त कर विवि को मौखिक रूप से बता दिया गया था। जो उस समय किसी कारणवश लिखित में नहीं दिया गया था। यदि विवि को लिखित में चाहिए तो मैं लिखकर देने के लिए तैयार हूं। अब हमारे पास रुद्रपुर में ही 300 बेड का अस्पताल और ईएसआई हास्पिटल भी मौजूद है। - रंजना राजगुरु, डीएम।