काशीपुर। राजकीय प्राथमिक विद्यालय नूरपुर के जर्जर भवन में नौनिहाल अपने भविष्य को तराशने के लिए मजबूर हैं। बरामदे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। हैंडपंप का हलक सूखने से विद्यार्थियों को पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
राप्रावि नूरपुर की स्थापना 1972 में हुई थी। इसमें दो कक्ष और एक प्रधानाध्यापक कार्यालय है। विद्यालय में 18 विद्यार्थियों को पढ़ाने का जिम्मा दो शिक्षकों पर है। देखरेख के अभाव में स्कूल भवन बदहाल है। विद्यालय की छत से प्लास्टर उखड़ गए है और सरिया दिख रहे हैं। खिड़की, दरवाजों को दीमक लग चुके हैं। फर्श भी उखड़ चुका है। ऑफिस ताला लगाकर बंद कर दिया गया है। शौचालय की स्थिति बदतर है। बरसात में छत से पानी टपकता है। बच्चे और शिक्षक जान जोखिम में डालकर बरामदे में बैठने को मजबूर हैं। वहीं, गेट के पास चाहरदीवार तक नहीं है। तीन बार प्रस्ताव भेजने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
पेयजल घर से लाते हैं बच्चे
- स्कूल में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप सालों से खराब है। पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। कक्षा चार की छात्रा महक और पांचवीं की छात्रा अनुष्का ने बताया कि बरामदे में बैठकर पढ़ते हैं। पानी घर से लाते हैं। संवाद
कोट:
20 अगस्त 2025 को स्कूल में तैनाती ली है। उस समय छात्र संख्या 16 थी, अब 18 है। कक्षों और ऑफिस जर्जर हो चुके हैं। सरकारी हैंडपंप खराब पड़ा है। सरकारी पानी सुबह-शाम आता है। भोजनमाता घर से बाल्टी में पानी लाती है। तीन बार प्रस्ताव भेज चुके हैं। स्वयं खर्च करके रसोई के लिए गैस सिलिंडर, चूल्हा और अन्य सामान खरीदा है।
अश्वनी कुमार शर्मा, प्रधानाध्यापक, जीपीएस नूरपुर
कोट:
जर्जर विद्यालयों के कुछ प्रस्ताव आपदा में रखे गए थे। नूरपुर विद्यालय इसमें है या नहीं इसको दिखवाया जाएगा। हो सकता है डीईओ बेसिक को जानकारी हो। स्कूल में पेयजल समेत अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने का प्रयास किया जाएगा।
कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षाधिकारी, ऊधमसिंह नगर
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