रुद्रपुर। जिला अस्पताल में जन्मे नवजात को बगैर विधिक कार्यवाही के किसी अन्य दंपती को देने के मामले में बाल कल्याण समिति ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग की। इसके साथ ही समिति ने अस्पताल में भर्ती नवजात की सुरक्षा के लिए एसएसपी को पत्र भेजा है। इधर स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले की जांच शुरू नहीं हो सकी है।
रविवार की रात जिला अस्पताल में नगर की ट्रांजिट कैंप निवासी एक महिला ने पुत्र को जन्म दिया था। महिला के पहले से तीन बच्चे थे। दंपती बच्चा रखना नहीं चाहते थे। मौके पर मौजूद स्टाफ नर्स के माध्यम से नवजात रात में ही नगर के सोडी कालोनी निवासी किसी दंपती को दे दिया गया। मामला उजागर होने पर बाल कल्याण समिति के हस्तक्षेप के बाद सोमवार को नवजात को फिर से अस्पताल के न्यू बॉर्न बेबी आईसीयू में भर्ती करा दिया गया था।
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने डॉ. पंकज माथुर (अतिरिक्त निदेशक) की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करने की जानकारी दी थी। जांच कमेटी में मेडिकल काॅलेज के विभागाध्यक्ष मेडिसन प्रो. मकरंद सिंह और एसीएमओ डाॅ, डीपी सिंह को बतौर सदस्य शामिल किया गया था। डॉ. माथुर ने बताया कि जांच कमेटी गठित होने की सूचना उन्हें मिली है लेकिन आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलते होते ही जांच शुरू कर दी जाएगी। पत्र में दी गई अवधि के भीतर जांच पूरी कर ली जाएगी। जांच के बाद रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपी जाएगी।
इधर नवजात के पिता और बच्चा लेने वाले दंपती की बाल कल्याण समिति ने काउंसिलिंग की। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष एडवोकेट प्रेमलता सिंह बताया कि दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर गैर कानूनी कृत्य के बारे में बताया गया और नियमों से अवगत कराया। इस घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने की हिदायत दी गई। अस्पताल में भर्ती नवजात की सुरक्षा के लिए एसएसपी को पत्र भेजने के साथ ही डाॅक्टर को भी उसके स्वास्थ्य की देखभाल करने को कहा गया है। बताया कि नवजात अपनी मां के पास रहेगा।