रुद्रपुर। तेजी से बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और तनाव के कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड और मोटापा जैसी लाइफस्टाइल से बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अब आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पद्धतियां रोग को जड़ से समझने, दिनचर्या सुधारने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक भूमिका निभाती हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज हाॅस्पिटल के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. आलोक शुक्ला के अनुसार लाइफस्टाइल रोग केवल दवा से नहीं,बल्कि खानपान, योग, दिनचर्या और मानसिक संतुलन से नियंत्रित होते हैं। मोटापा, पाचन समस्या और मधुमेह के मामलों में हर्बल औषधि और पंचकर्म जैसी प्रक्रियाओं से लाभ मिलने की बात मरीज भी स्वीकार करते हैं। वहीं होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कीर्ति पाठक का अनुसार बीपी, माइग्रेन और थायरॉइड असंतुलन जैसे रोगों में लंबी अवधि का व्यक्तिगत उपचार राहत देता है।
आयुर्वेद क्लीनिक में साप्ताहिक 120–180 मरीज लाइफस्टाइल रोगों से संबंधित परामर्श के लिए पहुंचते हैं। होम्योपैथिक विशेषज्ञ बताती हैं कि सप्ताह में 80–140 मरीज बीपी, थायरॉइड और माइग्रेन जैसी समस्याओं को लेकर आते हैं। संयुक्त रूप से देखा जाए तो आयुर्वेद व होम्योपैथी के क्लीनिकों में वार्षिक 18,000 से 30,000 तक मरीज लाइफस्टाइल बीमारियों के लिए संपर्क करते हैं। इनमें से करीब 5,000–8,000 मरीज ऐसे होते हैं जो नियमित फॉलोअप भी कराते हैं। मोटापा और पाचन समस्या से जुड़े मामलों की संख्या औसतन सप्ताह में 40–60 केस तक बताई जाती है।