पर्यावरण कंट्रोल बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी अमरजीत सिंह ओबेराय ने सीईटीपी प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने सीईटीपी संचालक कंपनी को गंदे पानी के ट्रीटमेंट में सावधानी बरतने की हिदायत दी। कहा कि पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने सीईटीपी को कंपनियों से मिलने वाले गंदे पानी की भी जानकारी ली। टीम ने प्लांट से ट्रीट किए पानी के सैंपल भी लिए।
शुक्रवार को पर्यावरण कंट्रोल बोर्ड की टीम ने सिडकुल के जिंदल कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट (सीईटीपी) प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने सीईटीपी की क्षमता और उससे जुड़ी कंपनियों और पानी के ट्रीटमेंट की जानकारी ली। प्लांट के इंजीनियर राहुल कुमार आजाद ने बताया कि सीईटीपी की क्षमता चार एमएलडी है। वर्तमान में 87 कंपनी सीईटीपी से जुड़ी हैं।
इनमें से 12 वैट कंपनियों द्वारा इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं, जोकि प्लांट से पानी ट्रीट कर सीईटीपी को देती हैं। मुख्य पर्यावरण अधिकारी ओबेराय ने सीईटीपी से ट्रीट किए जा रहे पानी का सैंपल लिया। इसके अलावा टीम ने सीईटीपी से सटी गुजरात अंबुजा फैक्ट्री का भी निरीक्षण किया और फैक्ट्री प्रबंधन को गंदे पानी को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए।
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी सोमपाल सिंह ने बताया कि सिडकुल की सभी कंपनियों को गंदा पानी सीईटीपी को देने के सख्त निर्देश हैं। अगर, कोई कंपनी पानी नाले या नहर में छोड़ेगी तो सख्त कार्रवाई होगी। वहां पर सहायक पर्यावरण अधिकारी राकेश कंडारी, एल्डिको के डीजीएम संदीप चावला आदि थे।