काशीपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम के टिकट सिस्टम में सेंधमारी से घपला करने का मामला सामने आया है। परिचालकों ने रोडवेज टिकटों पर अंकित समय से छेड़छाड़ कर एक महीने तक रोजाना पांच से छह रुपये की हेराफेरी की। चार घंटे में रामनगर से दिल्ली बस पहुंचना दर्शाया गया जबकि इसमें लगभग छह घंटे से अधिक समय लगता है।
मुख्यालय की टीम ने वे-बिलों की जांच की तो गड़बड़ी की परतें खुलती गईं। जांच में सामने आया कि पिछले लगभग एक महीने से परिचालक मशीन की तकनीकी खामियों का फायदा उठा रहे थे। रोजाना टिकटों में मैनुअल बदलाव किया जा रहा था। रामनगर से दिल्ली की 277 किलोमीटर की दूरी सामान्यतः साढ़े छह घंटे में तय होती है। सरकारी रिकॉर्ड में इस यात्रा को चार से साढ़े चार घंटे में पूरा दर्शाया गया। उदाहरण के ताैर पर एक मामले में सुबह 10 बजे रामनगर से रवाना हुई बस का चार घंटे में दिल्ली पहुंचना दर्ज किया गया है। संदेह होने पर अन्य परिचालकों के वे-बिल भी जांचे गए। अधिकांश रिकॉर्ड में टिकट जारी होने का समय सुबह से शाम तक दर्ज था। इसके उलट चार परिचालकों के वे-बिल में टिकट जारी करने का समय केवल दोपहर के बाद का दर्शाया गया था। छानबीन में पता चला कि उनकी बसें सुबह आठ से दस बजे के बीच रवाना होती हैं।
इस मामले की मुख्यालय स्तर पर विस्तृत जांच की जा रही है। संबंधित परिचालकों के रूट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। आने वालों दिनों में प्रदेश के अन्य डिपो के परिचालकों के वे-बिलों की भी जांच हो सकती है।
ऐसे खुला मामला
एक यात्री ने परिचालक के व्यवहार की शिकायत मुख्यालय स्तर पर की थी। परिवहन मुख्यालय ने पांच सदस्यीय टीम रामनगर डिपो भेजी जिसमें टिकट मशीन कंपनी के प्रतिनिधि और टीआई शामिल थे। जांच के दौरान परिचालक मनीष कुमार, राजेश शर्मा, शीशपाल और हिमांशु से पूछताछ की गई और उनके वे-बिल की समीक्षा की गई। दो दिन तक जांच करने के बाद टीम देहरादून लौट गई।
वर्जन -
मुख्यालय स्तर से चार परिचालकों के वे-बिल की जांच हुई थी जिसमें गड़बड़ी पाए जाने पर चारों के खिलाफ जांच कर रही है। फिलहाल चारों परिचालक का रूट बंद कर दिया है। -नवीन आर्य, सहायक महाप्रबंधक रामनगर डिपो
चार परिचालकों के खिलाफ जांच चल रही है। टीम तथ्य जुटा रही है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
- भूपेश कुशवाह, डीजीएम आईटी, उत्तराखंड परिवहन निगम
मामला टिकट मशीन से जुड़ा है। इसकी जांच डीजीएम आईटी कर रहे हैं। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। - क्रांति सिंह, महाप्रबंधक (संचालन) उत्तराखंड परिवहन निगम