‘किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में जुट जाती है’। कुछ ऐसी ही कहानी है छड़ैल, हल्द्वानी की निया ठाकुर की। निया बचपन से ही बुलेट चलाना चाहती थीं, लेकिन उनका सपना छह माह पहले पूरा हुआ।
आज भी समाज में लड़कियों को कमजोर माना जाता है। 24 वर्षीय निया ने बताया कि दोस्त और परिजन अक्सर बुलेट चलाने के उनके सपने पर उनकी मजाक बनाते थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
अमर उजाला से हुई बातचीत में निया ने बताया उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए 17 वर्ष की उम्र से ही सेविंग करनी शुरू कर दी थी। इस दौरान लड़की होने की वजह से उन्हें लोगों के कई सवालों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और छह माह पहले बुलेट लेकर अपने सपने को साकार किया।
तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर की निया की शिक्षा हल्द्वानी से हुई है। वर्तमान में वह एलएलबी कर रही हैं।
दोस्त कहते थे, लड़कियां बुलेट नहीं चला सकतीं
निया ने बताया कि जब उन्होंने बुलेट चलाने के सपने के बारे में अपने दोस्तों को बताया तो सभी उनका उपहास बनाने लगे। दोस्त कहते थे कि बुलेट चलाना लड़कियों के बस की बात नहीं है। वो उसे कार लेने की सलाह देते। लेकिन, लोगों की नकारात्मक बातों से ही प्रेरणा लेकर उन्होंने निश्चय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए बुलेट तो अब लेनी ही है।
शोरूम वाले हो गए थे भौचक्के
निया ने बताया कि जब वह बुलेट लेने शोरूम गई तो वहां के मैनेजर सहित सेल्समैन सब भौचक्के रह गए। उन्हें एक लड़की का स्वयं के लिए बाइक लेने की बात पर उन्हें यकीन नहीं हुआ। इसी तरह जब वह लोन के लिए बैंक गई तो उन्होंने भी मना कर दिया। लेकिन बाद में उन्होंने लोन पास कर दिया।