नगर निगम, पंचायत और पालिका में शामिल पूर्ण एवं आंशिक ग्राम पंचायतों को चतुर्थ राज्य वित्त आयोग और 14वें वित्त आयोग की अवशेष धनराशि वितरित करने को लेकर संशय खत्म हो गया है। पंचायती राज निदेशक ने पूर्ण रूप से शामिल ग्राम पंचायतों का बजट संबंधित निकाय को देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आंशिक ग्राम पंचायतों के मामले में बजट का वितरण जनसंख्या के फार्मूले के आधार पर निकाय और ग्राम पंचायतों के बीच किया जाएगा। इधर, बजट आवंटन करने को तैयार बैठे जिला प्रशासन को परिसीमन की तस्वीर साफ होने का इंतजार है।
दरअसल जिले में निकायों के परिसीमन में 27 ग्राम पंचायत पूर्ण और 17 ग्राम पंचायतों को आंशिक रूप से निकायों में शामिल किया गया है। इस वजह से इन ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त आयोग की जारी द्वितीय किस्त और चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की अवशेष देय धनराशि का आवंटन नहीं हो सका है। दोनों मद में यह बजट करीब तीन करोड़ रुपये है। बजट आवंटन को लेकर डीएम ने पंचायती राज निदेशक को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश मांगे थे। इधर, हाइकोर्ट ने निकायों में शामिल गांवों के लोगों की आपत्तियों की सुनवाई कर निस्तारण के निर्देश दिए थे। जनसुनवाई और आपित्तयों के निस्तारण के बाद मामला शासन में है।
पंचायतीराज निदेशक ने डीएम को 15 अक्तूबर 2014 को जारी शासनादेश के आधार पर बजट आवंटन करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायत की कुल जनसंख्या में से नगर पंचायत और ग्राम पंचायत के बीच विभाजित जनसंख्या के आधार पर कुल अवमुक्त धनराशि को विभाजित किया जाएगा। यह पत्र डीएम ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजा गया है।
बजट आवंटन को लेकर दबाव का सहारा
रुद्रपुर। बताया जा रहा कि कई प्रधान पूरी धनराशि अवमुक्त करने को लेकर अफसरों पर दबाव बना रहे हैं। इसके तहत बेनाम शिकायती पत्र सीएम कार्यालय में देकर जिले के तीन अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। शिकायती पत्र के आखिरी में सिर्फ ग्राम प्रधान संगठन लिखा है। दिलचस्प बात यह है कि कई आरोप तो ऐसे हैं, जिनके कार्य उक्त अफसरों के अधीन ही नहीं आते हैं।
निकायों में शामिल पूर्ण एवं आंशिक गांवों को बजट अवमुक्त करनेे को लेकर शासन से दिशा-निर्देश मांगे गए थे, जो कि मिल गए हैं। पूर्ण रूप से शामिल ग्राम पंचायतों की पूरी धनराशि निकायों और आंशिक ग्राम पंचायतों का बजट जनसंख्या के आधार पर निकायों एवं पंचायतों में विभाजित होगा। परिसीमन की स्थिति साफ होने पर धनराशि अवमुक्त की जाएगी।
आलोक कुमार पांडेय, सीडीओ।