बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) पहली बार उत्तराखंड के 89 बलिदानी वीर सपूतों के परिवारों को सम्मानित करेगा। इसमें 30 परिवार कुमाऊं के हैं। शहीदी दिवस 21 अक्टूबर को होने वाले स्वर्ण जयंती समारोह की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। समारोह में आने वाले शहीदों के परिजनों का यात्रा से लेकर खाने-पीने तक का खर्च भी बीएसएफ वहन करेगा।
बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) जम्मू से काठगोदाम में कार्यक्रम की कमान संभाल रहे डिप्टी कमांडेंट भुवन जोशी ने फोन पर बताया कि एक दिसंबर 1965 को भारत सरकार ने बीएसएफ की स्थापना की थी। इसके गठन को इस साल 50 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस कारण पूरे देश में बीएसएफ अपनी स्वर्ण जयंती के साथ ही शहीदी दिवस धूमधाम से मना रहा है। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को शहीदी दिवस है। इस दिन देश के लिए बलिदान देने वाले उत्तराखंड के 89 शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।
21 अक्टूबर को बीएसएफ के आईजी पवन कुमार दुबे के निर्देशन में काठगोदाम स्थित सीआरपीएफ के मुख्यालय और कमांडेंट आरके नेगी के निर्देशन में डोईवाला बीएसएफ मुख्यालय देहरादून पर भव्य रूप से शहीदी दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। उनका कहना है कि काठगोदाम में होने वाले कार्यक्रम में बीएसएफ स्थापना के बाद से अब तक शहीद हुए कुमाऊं के बीएसएफ के 30 जवानों के परिवार शिरकत करेंगे।
इसके लिए शहीदों के परिजनों को कमांडिंग मुख्यालय देहरादून से पत्र के माध्यम से सूचना दी गई है। उनके परिजनों को घर से लेकर कार्यक्रम स्थल आने तक और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था बीएसएफ ने की है। बताया कि बीएसएफ के इतिहास में पहली बार शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जा रहा है। यह बीएसएफ की अनूठी पहल है।