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ट्रेन से कटकर बीएसएफ के हवलदार की मौत

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हवाई फायर कर हवलदार को अंतिम विदाई देते बीएसएफ के जवान। - फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। ट्रेन की चपेट में आकर बीएसएफ के हवलदार की मौत हो गई। उनका पार्थिव शरीर शनिवार को काशीपुर लाया गया। यहां स्थानीय श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई।
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बिहार के सीवान जिले के ग्राम तिलमापुर निवासी रामायण सिंह वर्ष 1965 में काशीपुर आकर बस गए थे। पहले वह काशीपुर शुगर मिल में कार्यरत रहे। बाद में उनकी नियुक्ति पीलीभीत शुगर मिल में हो गई थी। पीलीभीत में रहते समय वर्ष 1995 में उनके मंझले पुत्र रंजीत का चयन हजारीबाग (झारखंड) से बीएसएफ की 25वीं बटालियन में आरक्षी के पद पर हुआ।
रंजीत की तैनाती दिल्ली और बाघा बॉर्डर अमृतसर में रही। हवलदार पद पर पदोन्नित के बाद से रंजीत दिल्ली के सेक्टर-1 आरकेपुरम में डीजी के वाहन चालक के पद पर तैनात थे। रंजीत का विवाह कुशीनगर, बलिया निवासी ऋतु सिंह के साथ हुआ था। वर्तमान में वह पत्नी और दो जुड़वा बच्चों आदित्य एवं अदिति के साथ ओल्ड फरीदाबाद में रह रहे थे।
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रंजीत के बड़े भाई विजय प्रताप ने बताया कि एक जनवरी की सुबह वह रोजाना की तरह घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। बाद में वह रेलवे ट्रैक के किनारे घायल अवस्था में पड़े मिले। उनकी स्थिति देखकर लग रहा था कि वह किसी ट्रेन की चपेट में आकर घायल हुए हैं।
रेलवे पुलिस ने घायल अवस्था में उन्हें फरीदाबाद के बीके हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के पुत्र आदित्य ने फोन कर अपने ताऊ विजय और चाचा धर्मेंद्र को घटना की जानकारी दी। शनिवार को बीएसएफ के एएसआई मिल्खू राम हवलदार का शव लेकर काशीपुर स्थित सुभाषनगर कॉलोनी में उनके आवास पर पहुंचे।
सुबह करीब 10 बजे श्मशान घाट पर छावला कैंप 25वीं बटालियन बीएसएफ के एसआई धर्मवीर सिंह के नेतृत्व में नौ सदस्यीय गारद ने हवलदार रंजीत को अंतिम सलामी दी। मृतक के पुत्र आदित्य ने चिता को मुखाग्नि दी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी खिलेंद्र सिंह, पार्षद मोनू चौधरी व तेजवीर सिंह आदि ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।
बेटे का शव देख फूट-फूटकर रोए पिता
काशीपुर। हादसे में हवलदार रंजीत की मौत के बाद से पूरा परिवार शोक में डूबा है। बेटे के शव को देख उनके वृद्ध पिता रामायण सिंह फफक-फफक कर रो पड़े। रामायण ने कहा कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी के आखिरी पड़ाव में उन्हें यह मनहूस दिन भी देखना पड़ेगा।
रामायण अपने दो पुत्रों के साथ सुभाषनगर कॉलोनी में रहते हैं। उनकी पत्नी नेमा की चार वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। तीनों बेटियों ऊषा, पुष्पा और संभा का विवाह हो चुका है। (संवाद)

रंजीत की अंतिम यात्रा में शामिल लोग।- फोटो : KASHIPUR

हवलदार स्व. रंजीत का फाइल फोटो।- फोटो : KASHIPUR

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