काशीपुर। पकने के साथ ही धान की फसल पर तेला (ब्राउन प्लांट हॉपर) का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह कीट धान की पत्तियों से रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। इसमें पत्तियों की ऊपरी सतह पर काले रंग की फफूंदी उग जाती है। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया ठप हो जाती है और पौधे कम भोजन बनाते हैं।
धान की फसल तैयार होने में कुछ ही समय बचा है। ऐसे में तेजी के साथ ब्राउन प्लांट हॉपर कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। धान की फसल में इस कीट का प्रकोप इतनी तेजी के साथ फैलता है कि यदि किसी खेत में इसकी शुरुआत हो जाए और किसान इसमें थोड़ी लापरवाही कर दें तो यह दो-तीन दिन में पूरे खेत में फैल जाता है।
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि यह कीट हल्के भूरे रंग के होते हैं। इस कीट से प्रभावित फसल को हॉपर बर्न कहते हैं। इस कीट का असर सितंबर से अक्टूबर तक अधिक रहता है। इस कीट का जीवन चक्र 20 से 25 दिनों का होता है।
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कैसे करें नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि कीट नियंत्रण के लिए कीट से प्रभावित खेतों से सबसे पहले पानी निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। सप्ताह में एक बार पानी निकालें और भरें। नाइट्रोजन और पोटेशियम युक्त तत्वों का प्रयोग सावधानी करें। 10 मिली लीटर प्रति लीटर की दर से निमीसिडन या नीम गोल्ड का छिड़काव करें। इसमें कोई डिटर्जेंट भी मिलाएं। ऐसा करने से मादा कीटोंं की प्रजनन क्षमता काफी कम हो जाती है। रासायनिक नियंत्रण में इमिडाक्लोप्रिड, इथोफैनपाक्स पाईमेट्रोजिन फिप्रोनील इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं।