बचपन से ही बाक्सिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना संजोए बाक्सर ब्रजेश कुमार मीणा के सामने सुनहरा मौका है। वेनेजुएला में अगले महीने होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में मुक्के का दम दिखाएंगे। चैंपियन बनने में कोई कसर नहीं छूटे, इसके लिए वह कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में वह अपने कोच से प्रतिद्वंद्वी को चित करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। कई नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिता को जीतकर प्रतिभा का लोहा मनवा चुके ब्रजेश की भारत में रैंकिंग दूसरे स्थान पर है। दरअसल राजस्थान के भरतपुर स्थित इंद्रोली गांव निवासी ब्रजेश कुमार मीणा ने बचपन से ही बॉक्सर बनने का सपना देखा और सपना पूरा करने के लिए 12 साल की उम्र से ही प्रशिक्षण लेना शुरु कर दिया। उन्होंने 33 किलोग्राम से खेलना शुरु किया और वर्तमान में 81 किग्रा भार में खेल रहे है। वह अब तक 200 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिता खेल चुके है, जिसमें से 180 प्रतियोगिता जीत चुके हैं। डब्लूबीसी बेल्ट के साथ प्रथम स्थान पर है। वर्तमान में वह काशीपुर में साई के बॉक्सिंग कोच हरजिंदर सिंह संधू से प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह बताते हैं कि 3 से 8 जुलाई तक वेनेजुएला में होने वाली इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कड़ी मेहनत में जुटे हैं और कोच से प्रशिक्षण ले रहे है। इसके बाद वह बॉक्सिंग प्रीमियर लीग के बैनर तले अक्टूबर में होने वाली इंटर कांटीनेंटल फाइट में भाग लेंगे।
वह बताते हैं कि कोच हरजिंदर सिंह संधू से प्रशिक्षण लेकर ही वह पहली बार 2003 में नेशनल बॉक्सर बने। उन्हें जब मौका मिलता है तो वह कोच के पास आकर प्रशिक्षण लेेते हैं। उनका कहना है कि वो दिन दूर नहीं जब वह वर्ल्ड चैंपियन विजेंदर सिंह को भी पीछे छोड़ देंगे।
यूपी में लिया प्रशिक्षण, नहीं मिला मौका
काशीपुर। ब्रजेश कुमार मीणा ने बताया कि उसने यूपी के आगरा और मेरठ में प्रशिक्षण तो लिया, लेकिन उनको नेशनल में खेलने का मौका नहीं मिला। इंडिया टीम के लिए पहला कैंप हिसार 2007 में लगा, जिसमें उनका चयन हुआ। 2009 में क्यूबा में हुए अल्वा गेम्स प्रतियोगिता में जीत हासिल कर उन्होंने देश का नाम रोशन किया था। बीते 29 मई को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुई इंटरनेशनल एशियन चैंपियनशिप 12 राउंड की प्रतियोगिता में फिलीपिंस के नेल्सन को तीसरे राउंड में नॉकआउट कर 76 किग्रा भार में डब्लूबीसी एशिया टाइटल बेल्ट जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनका कहना है कि यदि मुझे कोच हरजिंदर सिंह संधू और मेरे दोस्त नहीं मिलते तो मैं इस मुकाम पर नहीं पहुंचता।
रेलवे में चीफ ट्रेन क्लर्क हैं ब्रजेश
काशीपुर। ब्रजेश कुमार मीणा ने बताया कि उसने राजस्थान से आगरा आकर पढ़ाई की। उनके पिता चरन सिंह मीणा रेलवे में नौकरी करते थे। अचानक 2009 में पिता की मृत्यु हो जाने के बाद उनके परिवार पर विपत्ति आ पड़ी। जिससे उन्हें दो साल तक बॉक्सिंग से दूर रहना पड़ा। आगरा से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2011 में पिता के स्थान पर रेलवे में चीफ ट्रेन क्लर्क के पद कर कार्यरत है। नौकरी के साथ साथ बॉक्सिंग को नहीं छोड़ना चाहते। भाई डा. मनोज मिणा एमबीबीएस करने के बाद मेरठ में पीजी की तैयारी कर रहे है। उनकी बहन इलाहाबाद बैंक में मैनेजर है।