रुद्रपुर में उद्यम सिंह नगर जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सामने आए आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। जिले में ब्रेस्ट कैंसर अब एक गंभीर और तेजी से फैलती स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि जिले में कुल 1,22,946 महिलाओं की जांच की गई। इसमें 2,063 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की शिकार पाई गईं।
यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति खटीमा क्षेत्र से सामने आई है, यहां 22,273 महिलाओं की जांच में से 1,126 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित पाई गईं। मतलब, खटीमा में हर 20 में से एक महिला बीमारी की जद में है। यह आंकड़ा जिले के अन्य क्षेत्रों की तुलना में सबसे अधिक है। रिपोर्ट ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
देरी से जांच, जागरूकता की कमी से बढ़ रहे मामले
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी, देर से जांच, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और सामाजिक झिझक इसके प्रमुख कारण हैं। अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच जाती है। यही वजह है कि कई मामलों में इलाज देर से शुरू होता है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। रुद्रपुर, सितारगंज, किच्छा और बाजपुर जैसे इलाकों में भी लगातार ब्रेस्ट कैंसर के नए मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे स्क्रीनिंग कार्यक्रमों से सच्चाई तो सामने आ रही है लेकिन इलाज और फॉलोअप की व्यवस्था अब भी नाकाफी है।
-सिर्फ तीन महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर
विकास खंड जांच की गई जांच के बाद रेफर
खटीमा 22273 1126
बाजपुर 8870 140
गदरपुर 14563 30
जसपुर 13017 132
काशीपुर 18760 19
किच्छा 19074 10
सितारगंज 9614 606
शहरी क्षेत्र 16775 3
- 30 से अधिक आयु की महिलाओं में होती हैं ब्रेस्ट कैंसर की संभावनाएं
राजकीय मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ. केएस शाही का कहना है की यदि समय रहते नियमित जांच, जागरूकता अभियान और सुलभ इलाज की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। खासकर 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में यह खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके रोकथाम और जागरूकता के लिए जिले में विशेष ब्रेस्ट कैंसर यूनिट, मोबाइल स्क्रीनिंग वैन और ग्रामीण स्तर पर महिला स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही, महिलाओं को भय और संकोच से बाहर निकालकर जांच के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है।