काशीपुर। अपराध की जांच और अदालत में सजा तक पहुंचाने वाले सबूतों को सुरक्षित रखने वाला मालखाना अव्यवस्था के बोझ तले दबता जा रहा है। काशीपुर कोतवाली का मालखाना पुराने मुकदमों के सामान से अटा पड़ा है। यहां 20-22 साल पुराने मामलों से जुड़ी वस्तुएं अब तक जमा हैं और खराब हो रहे हैं। हालत ऐसी है कि ड्रग्स, शराब और करेंसी नोट चूहों के लिए दावत का सामान बने हुए हैं।
मालखाने में वर्ष 2002 से लेकर वर्तमान तक के करीब दो हजार से अधिक मुकदमों का सामान रखा है। इनमें करीब तीन करोड़ रुपये के अप्रचलित नोट, लाखों रुपये की नकदी, सोने-चांदी और हीरे के जेवरात सहित कई अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल हैं। लंबे समय से पड़े इस सामान का रखरखाव अब मालखाना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है।
कानून के अनुसार सीआरपीसी की धारा 452 के तहत जब्त सामान मुकदमों में साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जाता है। अदालत के फैसले के बाद ही इनका निस्तारण किया जाता है लेकिन कोर्ट से पर्चा फैसला नहीं मिलने के कारण पुराने मामलों का सामान लगातार जमा होता जा रहा है। स्थिति यह है कि मालखाना मोहर्रिरों को यह पता लगाने में भी परेशानी हो रही है कि किस मुकदमे में क्या फैसला हुआ और किन मामलों में अपील लंबित है। पर्चा फैसला नहीं मिलने पर मालखाना मोहर्रिर संजीव कुमार ने पुराने मालों की चार सूचियां तैयार कर अभियोजन को सौंपी हैं।
इसके अलावा कुर्की से जुड़े 40 से अधिक मुकदमों का सामान भी लंबित है। करीब 500 लावारिस सामानों का निस्तारण नहीं हो सका है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज वाहनों की नीलामी भी लंबे समय से नहीं हो पाई है।
सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
मालखाने में रखे सरकारी असलहे और नकदी पहले भी चोरी हो चुके हैं। वर्ष 2016 में कोतवाली के मालखाने से सरकारी पिस्टल चोरी हो गई थी। मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और तत्कालीन माल मुहर्रिर जगदीश टम्टा को निलंबित किया गया था लेकिन पिस्टल बरामद नहीं होने पर अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई। वहीं 20 अप्रैल 2024 को मालखाने से 12.48 लाख रुपये चोरी होने का मामला सामने आया था। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। रकम की भरपाई के बाद मामला खत्म कर दिया गया।
सीलन भरे कमरे में सबूत
काशीपुर कोतवाली का मालखाना ब्रिटिशकालीन भवन में संचालित हो रहा है। भवन की खराब स्थिति और सीलन के कारण सामान खराब हो रहा है। एनडीपीएस एक्ट के 22 मुकदमों से जुड़े माल भी यहां रखे हैं। चूहों से भी नमूनों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन चीजों के आधार पर अपराध साबित होने हैं उनकी सुरक्षा व्यवस्था ही कितनी मजबूत है।
ट्रायल तक मालखाने में रखना जरूरी
ट्रायल के दौरान ही सामान का परीक्षण करने का नियम है। तब तक उसे मालखाने में रखना होता है चाहे कितने ही वर्ष लगें। कोर्ट से निर्णय होने के बाद पर्चा फैसला संबंधित थानों को भेजा जाता है। किसी मुकदमे के तहत जांच के दौरान जब्त माल नियमानुसार साक्ष्य के तौर पर रखे जाते हैं।
राहुल गौतम, अभियोजन अधिकारी, काशीपुर
माल सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते
मुकदमों के निस्तारण के बाद पर्चा फैसला आने पर ही माल नष्ट होता है। तब तक माल सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है और इससे बच नहीं सकतेश्र यद्यपि आबकारी एक्ट के कुछ मामलों में माल नष्ट करने की अग्रिम अनुमति कोर्ट से ली जा सकती है।
हरीश मेहरा, सेवानिवृत्त सीओ