अल्मोड़ा के कूपी गांव की तलहटी और नदी के किनारे समतल जमीन पीतल नगरी के लिए सोने जैसे खरी है। हवा, पानी और शुद्ध वातावरण यहां पीतल के लघु उद्योग स्थापित करने वालों को खींच लाएगी।
पीतल के व्यापार को स्थापित करने के लिए सर्वे कर रहे आला अधिकारियों को यह जगह रास आ गई है। दो दिन से यहां डेरा डालकर सर्वे कर रहे सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक ने देहरादून मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी है।
राज्य सरकार अब मुरादाबाद की तर्ज पर अल्मोड़ा जिले के सल्ट से लगे मरचूला के कूपी गांव के पास हस्तशिल्प पीतल के लघु उद्योग स्थापित करने जा रही है।
मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रंजीत रावत की पहल पर शासन ने इस पीतल नगरी की स्थापना के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को सिडकुल के आरएम जीपी दुर्गापाल अपनी टीम के साथ मरचूला के कूपी गांव पहुंचे।
वहीं, जिला उद्योग केंद्र अल्मोड़ा की महाप्रबंधक कविता रानी भी अपनी टीम के साथ चयनित जमीन का बारीकी से निरीक्षण कर रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि कूपी में हस्तशिल्प पीतल के लघु उद्योग को जल्द से जल्द शुरू करने की योजना है। सरकार इस दिशा में काफी गंभीर है।
इससे पहाड़ के हजारों बेरोजगार लोगों को जहां रोजगार के संसाधन मिलेंगे वहीं राज्य सरकार को भी इन लघु उद्योगों के जरिये काफी फायदा मिलेगा।
पहाड़ों में मिनी सिडकुल स्थापित करने का सरकार यह अभिनव प्रयास होगा। सिडकुल के अधिकारियों का कहना है कि मरचूला की पीतल नगरी के लिए अभी से कई संस्थानों से संपर्क भी किया जाने लगा है। जमीन का सर्वे पूरा हो गया है। हस्तशिल्प पीतल के लघु उद्योग के लिए चयनित जगह हर दृष्टि से उपयुक्त है।