काशीपुर। थानों में बैठकर विवेचना पूरी करने के आदी हो चुके पुलिस अधिकारी अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों से परेशान हैं। डिजिटल साक्ष्य रिकॉर्ड करने में उनके पसीने छूट रहे हैं।
शिथिल विवेचना से हल्द्वानी, काशीपुर, जसपुर और आईटीआई समेत कई थानों में दर्ज मामलों में आरोपियों के रिमांड खारिज़ हो चुके हैं। ट्रायल के दौरान भी अभियोजन पक्ष को साक्ष्य संबंधी दिक्कतें पेश आ रही हैं।
एक जुलाई, 2024 से देश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह बीएनएस लागू हुआ है। बीएनएस के प्रावधानों के तहत विवेचना अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखना होता है। न्याय का मूल सिद्धांत हैं कि संदेह चाहे जितना भी गहरा हो लेकिन उसे ठोस सबूतों के साथ अदालत में साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। इसी मकसद से तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी या ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है।
धारा 63 व धारा 35 का नहीं हो रहा अनुपालन
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 के तहत जुटाए साक्ष्यों के संबंध में आईओ (जांच अधिकारी) को प्रमाण पत्र देना होता हैं कि मुकदमे से संबंधित डेटा प्रामाणिक है और किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है। वहीं बीएसए की धारा 35 के नोटिस के अनुपालन न होना भी रिमांड खारिज होने की बड़ी वजह है।
सात साल से कम सजा के मामलों में गिरफ्तारी की बजाय धारा 35 का नोटिस देना होता है। डिजिटल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर पाने से रिमांड खारिज हो रहे हैं। इनमें दो केस तो पुलिस टीम पर जानलेवा हमले से संबंधित है।
ट्रायल के दौरान भी तमाम मामलों में पुलिस के साक्ष्य औंधे मुंह गिर रहे हैं। उच्च अधिकारियों के स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है जिससे स्थिति में अपेक्षाकृत सुधार हुआ है।
केस एक .....
20 अगस्त 2024 को आईटीआई थाना पुलिस ने खनन रायल्टी चेक करने वाली टीम पर जानलेवा हमला करने के तीन आरोपियों ग्राम परमानंदपुर निवासी आशिक़, अतीक और अशरफ को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। साक्ष्य अधूरे होने से कोर्ट ने आरोपियों की रिमांड खारिज़ कर दी।
केस दो.....
13 जुलाई 2024 को जसपुर पुलिस ने बिना रॉयल्टी के खनन परिवहन करने और पुलिस पर हमला करने के आरोप में गाजियाबाद के सादिक को गिरफ्तार किया था। डिजिटल साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने आरोपी का रिमांड मंजूर नहीं किया।
इनसेट.....
जांच अधिकारी गवाहों को जारी नहीं करते समन
काशीपुर। मामलों में गवाहों को तलब करने के लिए विवेचना अधिकारी को समन जारी करने का अधिकार है। बीएनएस में इसे धारा 179 का नोटिस कहा गया है जबकि सीआरपीसी में यह धारा 160 के तहत जारी होता था लेकिन अधिकांश मामलों में आईओ गवाहों के बयान तो दर्ज कर लेते हैं लेकिन उन्हें बुलाने के लिए नोटिस नहीं भेजते। अमूमन बचाव पक्ष को इसका भी फायदा मिलता है।
कोट -
शुरुआत में बीएनएस के प्रावधानों के तहत साक्ष्य जुटाने में कुछ दिक्कतें आ रहीं थीं जिससे रिमांड खारिज हुए हैं। अब कोई दिक्कत नहीं हैं। समय-समय पर बैठक कर इसकी समीक्षा की जा रही है।
- रिद्धिम अग्रवाल, आईजी कुमाऊं