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ब्लड बैंक को रक्तदाताओं की दरकार

Fri, 17 Mar 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
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काशीपुर सरकारी अस्पताल में बना ब्लड बैंक। - फोटो : अमर उजाला
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 ब्लड बैंक में नाम मात्र का ही रक्त रह गया है। जिससे मरीजों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। आचार संहिता के चलते दो महीने से किसी भी संस्था का रक्तदान शिविर न लगने से ब्लड बैंक में ब्लड की कमी हो गई हैै। सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना में घायल मरीजों, थैलीसीमियां के मरीजों के लिए जरूरत पड़ने पर ब्लड जुटाना तीमारदारों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में 2000 हजार यूनिट रक्त स्टोर करने की क्षमता है। लेकिन बैंक में महज 12 यूनिट ही ब्लड बचा है। गंभीर स्थिति यह है कि ब्लड के शेष स्टॉक में ओ पॉजिटिव, एबी पॉजिटिव और बी निगेटिव रक्त नहीं है। कोई बड़ी दुर्घटना होने पर मरीजों को जान जाने का खतरा भी पैदा हो सकता है। अस्पताल में ट्रामा सेंटर होने की वजह से जिला पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, के अलावा रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर से सड़क दुर्घटना के मरीज और अन्य मरीज भी आते हैं। ऐसे में यदि कोई गंभीर मार्ग दुर्घटना का मरीज आ जाए तो अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़े कर सकता है।

दो महीने से चुनाव प्रक्रिया चल रही है। जिसमें सभी संस्थाएं, डिग्री कालेज के छात्र और अन्य संस्थाएं चुनाव में व्यस्त थे। जिसके चलते  किसी भी संस्था का रक्तदान शिविर नहीं लग पाया, जिससे बैंक में ब्लड संकट पैदा हो गया है। ब्लड बैंक प्रभारी डा. मनु पांडे ने कहा कि आचार संहिता लगी होने से रक्तदान शिविर नहीं लगाए गए। बीते दिसंबर में रामनगर में एक रक्तदान शिविर लगा था। इसके बाद सभी संस्थाएं चुनाव में व्यस्त हो गई। जिससे रक्त कोष में मात्र 12 यूनिट ब्लड बचा है। सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने बताया कि ब्लड बैंक में ब्लड की कमी हो गई है। शुक्रवार को रामनगर में 200 यूनिट का रोट्रेट क्लब की ओर से एक रक्तदान शिविर लगेगा। कुछ हद तक रक्त की समस्या से निजात मिल पाएगी।
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