नजूल भूमि पर काबिज लोगों में उजड़ने के डर के बीच सियासत भी रफ्तार पकड़ रही है। सोमवार को बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर रामलीला मैदान में प्रदर्शन होने जा रहा है। उस समिति के कर्ताधर्ता भी भाजपाई ही हैं। हालांकि यह नेता आयोजन को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का जरिया बता रहे हैं, लेकिन तेजी से गरमा रहे इस मुद्दे और प्रदर्शन को लेकर भाजपा में अंदरखाने बेचैनी बनी हुई है। कई नेता तो प्रदर्शन में पार्टी के लोगों के शामिल होने को गलत तो बता रहे हैं, लेकिन बस्तियों के अस्तित्व से जुड़ा सवाल होने की वजह से फिलहाल खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
दरअसल, रुद्रपुर में करीब 20 हजार परिवार नजूल भूमि पर काबिज हैं। राजनैतिक पार्टियों खासकर सत्तारूढ़ भाजपा का बस्तियों में बड़ा वोट बैंक भी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नजूल पर काबिज लोगों के आशियाने उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है। रुद्रपुर, किच्छा के विधायक इस संबंध में कई बार सीएम से मिल चुके हैं। इधर, भाजपा के कुछ नेताओं ने बस्तियों के लोगों को मालिकाना हक देने की मांग को लेकर संघर्ष समिति गठित की है।
समिति की ओर से सोमवार को इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन होना है। इधर, नजूल के मुद्दे को लेकर जनता की गोलबंदी को पार्टी से हटकर सरकार के खिलाफ मोर्चा लेने के रूप में देखा जा रहा है।
चूंकि संघर्ष समिति में ज्यादातर भाजपाई हैं, लिहाजा पार्टी की चिंता भी बढ़ी हुई है। पूर्व में भी नजूल को लेकर निवर्तमान मेयर और पार्षदों के चुनाव लड़ने पर पांच वर्ष की रोक को लेकर भी नाराजगी जाहिर हो चुकी है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष राधेश शर्मा कहते हैं कि फिलहाल हम मर्यादा में रहकर आवाज उठा रहे हैं। यह 20 हजार परिवारों के अस्तित्व का सवाल है। एक लाख से अधिक का वोट बैंक भी है। प्रदर्शन तो प्रदर्शन है। अगर सुनवाई नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ बोलने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
मुझे भी प्रदर्शन में आमंत्रित किया गया है, लेकिन पहले मैं भाजपा हाईकमान से पूछूंगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही प्रदर्शन में जाने का निर्णय लिया जाएगा। -
राजकुमार ठुकराल, विधायक।
यह प्रदर्शन पार्टी का नहीं है। अगर पार्टी का कोई नेता सरकार के खिलाफ बोलता है तो उसकी जानकारी आला नेताओं को दी जाएगी। सरकार नजूल के मुद्दे को सुलझाने का प्रयास कर रही है। - हरीश सुखीजा, नगर अध्यक्ष भाजपा
नजूल को लेकर प्रदर्शन की जानकारी नहीं हैं। मैं सोमवार को शहर से बाहर रहूंगी। गलत शपथ पत्र देने के आरोप में शासन की तरफ से जो कार्रवाई मुझ पर हुई है, उसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर हो गई है। बुधवार या बृहस्पतिवार को इस पर सुनवाई होनी है। मेरी नाराजगी सरकार से नहीं, अधिकारियों से है। - सोनी कोली, निवर्तमान मेयर।
प्रदर्शन में कोई सरकार और पार्टी के खिलाफ नहीं बोलेगा। यहां बस्तियों के करीब पांच हजार लोग जुटेंगे। हम चाहते हैं कि बस्तियों को उजाड़ने के बजाय वहां रहने वालों को मालिकाना हक मिले। - शैलेंद्र कोली, संघर्ष समिति में शामिल और भाजपा नेता।
नजूल भूमि को लेकर प्रदर्शन आज, सीएम को भेजेंगे ज्ञापन
रुद्रपुर। नजूल भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग को लेकर मुहिम चला रही बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर मलिन बस्तियों के लोग सोमवार को रामलीला मैदान में एकत्र होंगे। इस दौरान प्रदर्शन कर और सीएम को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। संघर्ष समिति के संयोजक नत्थूलाल गुप्ता ने कहा कि नजूल पर बसे लोगों को बचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
समिति अध्यक्ष राधेश शर्मा ने कहा कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर सभी वर्गों से समर्थन मिल रहा है। मांग की जाएगी कि जल्द ही विधानसभा में बिल लाकर संबंधित लोगों को राहत दी जाए। बताया कि दो टीमों ने कार्यक्रम को लेकर विभिन्न बस्तियों में जनसंपर्क किया है। वहां विरेंद्र तिवारी, गोपी सागर, अभिनव चौधरी, शैलेंद्र कोली, लाखन सिंह, विजय वाजपेई, संजय हालदार, महावीर कश्यप, संतोष दिवाकर, राकेश दिवाकर, सतपाल लोधी आदि थे। ब्यूरो