काशीपुर। शहर के अस्पताल और रक्तकोषों में रक्तदान करने की प्रक्रिया में बदलाव होने जा रहा है। अब रक्तदान से पहले रक्तदाताओं का बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। अस्पताल में रक्तदाता की पहचान आधार कार्ड से होगी। इस पहल का उद्देश्य फर्जी और पेशेवर रक्तदान पर रोक लगाना और लोगों को दूषित खून से बचाना है।
स्वास्थ्य विभाग रक्तदाताओं की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) सत्यापन की नई व्यवस्था लागू कर रहा है। एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय के रक्तकोष में भी बायोमेट्रिक मशीन लगने जा रही है। मशीन ब्लड बैंक में पहुंच चुकी है। रक्तदाता को मशीन पर अपना अंगूठा लगाकर पंजीकरण करना होगा। इससे तीन महीने से पहले रक्तदान करने वाले को मशीन पहचान लेगी। ऐसे रक्तदाताओं की पहचान होने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा।
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दूषित खून पर लगेगी रोक, पेशेवर की होगी पहचान
कई स्थानों पर लोग धन के लिए पेशेवर रक्तदाता बन जाते हैं। उनकी ओर से दिए जाने वाले खून में कई बार खराबी देखने को मिलती हैं। भारी मात्रा में एल्कोहल का सेवन करने वाले का खून भी सुरक्षित नहीं माना जाता है। ऐसी परिस्थिति में दूषित खून को नष्ट करना पड़ता है। अब मशीन लगने से पेशेवर रक्तदाताओं की पहचान आसान हो जाएगी। नई व्यवस्था से रक्तदाताओं का एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे मरीजों को उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित रक्त मिल सकेगा।
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ब्लड बैंक में बायोमेट्रिक मशीन पहुंच चुकी है। तकनीशियन के इंस्टॉल करने के बाद यह प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह मशीनें सरकारी और प्राइवेट रक्तकोषों में लगाई जाएगी। -डॉ. मनु पांडे, प्रभारी रक्तकोष