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बहल्ला को फैक्ट्रियां बना रही जहरीला

Sat, 04 Jun 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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बहल्‍लाा - फोटो : अमर उजाला
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यदि किसी नदी से जलीय जीव गायब होने के साथ ही पक्षी और तितलियों ने भोजन के लिए मंडराना बंद कर दिया हो, समझो पानी किसी काम का नहीं है। ऐसा ही कुछ हाल बहल्ला नदी का भी हो गया है। यह नदी मालवा फार्म तक तो साफ रहती है, लेकिन उसके बाद पानी का रंग बदलकर काला होने के साथ ही उससे दुर्गंध उठने लगती है। फैक्ट्रियों से बहाए जाने वाले कैमिकल से नदी गंदे पानी के नाले में तब्दील हो गई है। पानी इतना दूषित कि यहां जानवर तो दूर जिस खेत में चला जाए, वहां की फसल ही चौपट कर दे। 
नदियों में प्रदूषण को लेकर एनजीटी के सख्त रुख के बाद भी अफसर सब कुछ देखने के बाद भी आंखें मूंदे बैठे हुए हैं। दरअसल तुमड़िया डैम के साथ ही कई नालों और श्रोतों का पानी बहल्ला नदी में आता है। यह नदी मालवा फार्म तक तो साफ रहने के साथ इसमें जलीय जीवों के साथ ही भोजन के लिए ड्रेगन फ्लाई, तितलियां और पक्षियां मंडराते रहते हैं। लेकिन उसके बाद नदी के लिए बुरे हालात शुुरू हो जाते हैं। नदी में चोरी छिपे कैमिकल बहाए जाने से साफ पानी काले झागयुक्त पानी में तब्दील हो जाता है। नदी में कैमिकल युक्त पानी बहने से जो लोग भी उसके आसपास रहते हैं, इसकी दुर्गंध से परेशान रहते हैं। किसी जमाने में बहल्ला नदी का पानी पीने के साथ ही सिंचाई के काम भी आता था। लेकिन धीरे-धीरे पानी में कैमिकल बहाया जाने लगा तो लोगों ने सिंचाई करना भी बंद कर दिया। कुछ दिनों पहले ही एनजीटी ने रामनगर में कोसी नदी में होने वाले प्रदूषण को लेकर डीएम को तलब किया है। लेकिन उसके बावजूद अफसर चेत नहीं रहे हैं। वहीं जनप्रतिनिधियों भी इस अहम और गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। हिम्मतपुर गांव के किसान किशोर कुमार कहते हैं कि नदी के किनारे खेत होने के बाद भी उन्होंने फसलों के लिए बोर लगा रखा है। अगर बदबूदार पानी से फसल सीचेंगे, वह नष्ट हो जाएगी। पूर्व में कई बार उनकी फसल नष्ट हो चुकी है। पहले नदी से कुआंखेड़ा, बरखेड़ी, दोहरी, हिम्मतपुर स्माइल के अलावा मुरादाबाद तक के किसान सिंचाई करते थे। किसान छोटेलाल कहते हैं कि बहल्ला नदी का पानी किसी काम का नहीं बचा है। कुछ साल पहले प्रदूषित पानी पीने से एक गांव में कईं जानवर मर गए थे। जानवर तो दूर पानी सिंचाई के काबिल भी नहीं रहा। कुछ समय पहले उन्होंने पानी चरी की फसल में लगाया तो वह सूख गई। 
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सिंचाई विभाग के एसडीओ विवेक शर्मा कहते हैं कि बहल्ला से साइफन बनाकर महादेव नहर को साफ पानी सप्लाई कि जाता है। इससे काशीपुर क्षेत्र के अलावा मुरादाबाद तक लोग सिंचाई करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ इंडस्ट्री का पानी बहल्ला में आने से प्रदूषित हो रही है। 

गंदे नाले भी कर रहे प्रदूषित
काशीपुर। बहल्ला नदी को प्रदूषित करने में फैक्ट्रियों के साथ ही गंदे नाले भी जिम्मेदार हैं। कई कालोनियों से गंदा पानी सीधे नदी में बहा दिया जाता है। इसके लिए लघु इकाईयों को भी पानी नदी में बहा दिया जाता है। जिसे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है। कभी साफ बहने वाली बहल्ला नदी में अब सफेद झाग और काला पानी की बहता दिखाई पड़ता है। 
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी एसपी सिंह ने कहा कि एक हफ्ते पहले ही उन्होंने चार फैक्ट्रियों को बहल्ला में गंदा पानी बहाने के संबंध में नोटिस दिए थे। अगर फिर कैमिकल बहाया गया है, तो वह दिखवाएंगे। नदी में कैमिकल बहाने वालों पर सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।   
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