दिनेशपुर। विधायक अरविंद पांडेय की ओर से विधानसभा सत्र के दौरान बंगाली समाज की उपजातियों को ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग उठाए जाने के बाद घमासान मच गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े बंगाली समाज के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मांग का कड़ा विरोध करते हुए इसे भाजपा का चुनावी शिगूफा करार दिया। वही भाजपा ने विधायक की मांग का स्वागत करते हुए इसे समुदाय हित में उठाया गया कदम बताया है।
बता दें कि गैरसैंण में चल रही विधानसभा सत्र के दौरान विधायक अरविंद पांडेय ने क्षेत्र की अन्य समस्याओं के साथ-साथ बंगाली समाज को ओसीबी में शामिल करने की मांग उठाई थी। जिसके बाद बंगाली समाज में घमासान मच गया। समुदाय के नेता इस मुद्दे पर दो खेमे में बंटते नजर आ रहे हैं। पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, कांग्रेस प्रदेश महामंत्री ममता हालदार, पूर्व बंगाली कल्याण समिति अध्यक्ष तारक बाछाड़ और आम आदमी पार्टी बंगाली समाज मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष व्यापारी ने ओबीसी की मांग का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में निवास करने वाले 90 फीसदी बंगाली समुदाय के लोग अनुसूचित जाति के है। जिन्हें देश के सात राज्यों में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। समुदाय के लोग वर्षो से अनुसूचित जाति के दर्जे की मांग कर रहे है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और जिला उपाध्यक्ष हिमांशु सरकार, मंडल अध्यक्ष विश्वजीत मंडल और पूर्व मंडल अध्यक्ष अनादि मंडल ने मांग का स्वागत करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति में शामिल करने का मामला केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में विचाराधीन है। मगर ओबीसी में शामिल करने का अधिकार राज्य सरकार के हाथ में है। ओबीसी का दर्जा मिलने के बाद भी अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को बरकरार रखा जा सकता है। विपक्ष इसमें राजनीति न करे तो बेहतर है।