बाजपुर। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्थायी, जाति प्रमाणपत्र बनाने का बाजपुर गढ़ बन गया है। यूपी के पीलीभीत सहित अन्य जगहों के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने और रोजगार के लिए जाति, स्थायी और अनाथ प्रमाण बनवाए गए है।
फर्जी तरीके से बने प्रमाण पत्रों का भंडाफोड़ एसडीएम ऋचा सिंह ने किया है। इसमें नौ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस अब प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह के मास्टमाइंड की तलाश में जुटी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस की शक की सुई शिवम माथुर पर है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए जाति, स्थायी प्रमाणपत्रों की जांच में सामने आया है कि इनका सबसे अधिक इस्तेमाल मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए किया गया। सत्यापन के लिए जो प्रमाणपत्र आए थे वो विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से तहसील बाजपुर भेजे गए थे। आरोपियों ने उत्तराखंड का स्थायी निवासी और आरक्षित जाति का लाभ लेकर सरकारी कोटे में दाखिला लेने की कोशिश की।
आरोपी श्याम बिहारी भोजवाल ने अपने लिखित बयान में कबूला है कि उसने अपने बेटे अनुराग भोजवाल का सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में दाखिला कराने के लिए ही पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास बनवाया था। जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बना था।
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गिरोह ने इन लोगों बनाए थे फर्जी प्रमाण
बाजपुर। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में चित्रा, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और रिया सिंह के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए जो निरस्त कर दिए गए हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई और कूटरचित दस्तावेज मिले हैं। आरोपी मोहम्मद आलम ने भी बयान दिया है कि काशीपुर का अरसान नाम का व्यक्ति अक्सर पांच-पांच हजार लेकर उससे प्रमाणपत्र बनवाता है। इससे अंदेशा है कि फर्जी प्रमाण पत्रों की संख्या बढ़ सकती है। इसी अंदेशे को लेकर एसडीएम ऋचा सिंह ने जनवरी 25 से सितंबर 26 तक के सभी जाति, स्थायी प्रमाण पत्रों की गहनात से सत्यापन और जांच करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए है। संवाद