काशीपुर। अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बदलते दौर में महिलाओं को भी अपनी सोच बदलनी होगी। इस दौरान राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका नमिता पंत को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
बुधवार को अपराजिता और इनरव्हील क्लब ऑफ काशीपुर की ओर से गिरीताल मंदिर रोड स्थित एक होटल में कार्यक्रम हुआ। महिलाओं ने कहा 21वीं सदी में भी अक्सर महिलाओं को हीन भावना से देखा जाता है। साथ ही शोहदों को देखकर छात्राएं या तो अपना रास्ता बदल देती हैं या फिर डर के कारण घर से निकलना बंद कर देती हैं। लेकिन ये वक्त शोहदों और पुरुषों की प्रताड़ना सहने का नहीं बल्कि उनका मुंहतोड़ जवाब देने का है। कहा गया कि अंतरिक्ष हो या सरहद की सुरक्षा महिलाएं पुरुषों के समकक्ष हैं। मौके पर राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका नमिता पंत ने वहां मौजूद महिलाओं को सशक्तिकरण की शपथ दिलाई। अधिवक्ता कामिनी श्रीवास्तव ने महिलाओं को कानूनी संबंधी जानकारी दी। वहां पर महिला सुंदर कांड समिति से नीमा पांडे, शुभा चतुर्वेदी, सुमन करगेती, माया गुप्ता, भावना खनूलिया, गायत्री, कल्पना शर्मा, आभा जोशी, प्रियंका जोशी आदि थे।
घर से बाहर निकलते हुए महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती है और उत्पीड़न के मामलों को दबा लेती है। ऐसा बिल्कुल भी न करें। अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मौके पर ही जवाब दें। अन्याय के प्रति आपकी सहनशीलता अपराध को बढ़ावा देती है।
-डॉ. मोनिका शर्मा,मीनू बाटला
महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें तो कोई भी उनका उत्पीड़न नहीं कर सकता। अपने अधिकारों का संरक्षण करते हुए परिवार को बांधे रखने और संस्कारित करने की जिम्मेदारी भी महिलाओं की है।
वंदना अरोरा, नीमा पांडे
मुश्किल वक्त में महिलाओं को किसी मदद का इंतजार किए बगैर खुद अपनी हिफाजत के लिए प्रयास करना चाहिए। पुरुषों की गलत सोच के खिलाफ आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है।
-गीता गुंसाई, सीमा मल्होत्रा