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मर्सिडीज से महंगा है अमीर हुसैन का घोड़ा

Wed, 21 Mar 2018 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर। 
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उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर चैती मेले के नखासा बाजार में खड़ा 55 लाख का घोड़ा। - फोटो : अमर उजाला
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मर्सिडीज से भी महंगा घोड़ा! जी हां चैती मेले में लगने वाले नखासा बाजार में एक घोड़े की कीमत मर्सिडीज बेंज से ज्यादा है। काशीपुर का चैती मेला नखासा बाजार के लिए भी प्रसिद्ध है। हर साल दूर-दूर से लोग यहां घोड़े खरीदने आते हैं। नखासा बाजार में इस साल राजस्थान, हरियाणा और यूपी से तकरीबन डेढ़ हजार घोड़े बेचने के लिए लाए गए हैं।

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इस बार बाजार में 55 लाख का एक घोड़ा आकर्षण का केंद्र है। मर्सिडीज से भी महंगे इस घोड़े के मालिक कुमाऊं विहार कालोनी काशीपुर निवासी अमीर हुसैन ने बताया कि उनका घोड़ा राजा करीब तीन साल का है। बताया कि सिंधी नस्ल के इस घोड़े की ऊंचाई करीब पांच फुट है। उन्होंने घोड़े की कीमत 55 लाख रुपये बताई।

250 ग्राम घी, 10 लीटर दूध पी जाता है राजा
अमीर हुसैन ने बताया कि राजा 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है। इसकी यही खासियत इसे अन्य घोड़ों से अलग बनाती है। वह और परिवार के लोग राजा की खुराक का विशेष ध्यान रखते हैं। उन्होंने बताया कि राजा को हरे चारे के अलावा गुड़ और चोकर भी खिलाया जाता है। इसके अलावा राजा को रोजाना 250 ग्राम घी और करीब 10 लीटर दूध दिया जाता है। रोजाना दो लोग एक घंटे घोड़े की मालिश करते हैं।  
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गंदा पानी पी रहे घोड़े
काशीपुर। चैती मेला परिसर में पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे लोग खुले में शौच को जाने को मजबूर हैं। मेला के बीच सड़क किनारे पहले से लगा प्याऊ भी चालू नहीं किया गया। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग परेशान हैं। घोड़ा व्यापारी चौधरी शौकत अली ने कहा पानी नहीं होने के कारण घोड़ों को मजबूरन नहर का दूषित पानी पिलाना पड़ता है। बिजली व्यवस्था नहीं होने के कारण मेला में रात को अंधेरा छाया रहता है।

स्वच्छता अभियान को आइना दिखा रहा मेला प्रबंधन
काशीपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को काशीपुर चैती मेले में काम करने वाले मजदूर पलीता लगाने में लगे हैं। मेला प्रबंधक द्वारा शौचालयों की व्यवस्था नहीं कराए जाने से मजदूर चैती मेला परिसर से कुछ दूरी पर मौजूद टीले में शौच को जा रहे हैं। लोगों के अनुसार पिछले साल तक मेले में 130 अस्थाई शौचालय बनाए जाते थे।

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