रुद्रपुर जिला अस्पताल में इलाज के लिए तड़प रही वृद्ध महिला बसंती देवी
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जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। सोमवार को दिमाग की नस फटने से एक बुजुर्ग महिला दो घंटे अस्पताल में तड़पती रही। न्यूरो सर्जन न होने से महिला को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया गया था, लेकिन यहां 108 एंबुलेंस का टायर पंक्चर था। आखिर परिजनों को निजी वाहन से ही हल्द्वानी ले जाना पड़ा।
खेड़ा, वार्ड नंबर 3 निवासी 65 वर्षीय बसंती देवी को दिमाग की नस फटने पर परिजन सोमवार सुबह करीब आठ बजे जवाहर लाल नेहरू अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां न्यूरोसर्जन न होने के कारण महिला को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। जब 108 एंबुलेंस को फोन किया गया तो पता चला कि एंबुलेंस का टायर पंक्चर हो गया है। अस्पताल की अपनी एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं थी। इससे बुजुर्ग महिला इलाज के अभाव में दो घंटे तड़पती रही। हालत गंभीर होने के चलते महिला की जान को भी खतरा था। ऐसे में परिजन निजी वाहन की व्यवस्था कर महिला को सुशीला तिवारी ले गये। उनके जाने के बाद अस्पताल में एंबुलेंस पहुंची। जिला अस्पताल के आपातकालीन चिकित्साधिकारी ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी और अस्पताल में न्यूरोसर्जन न होने के कारण उन्हें एसटीएच रेफर कर दिया गया था।
घिसे टायरों पर चल रही 108
108 एंबुलेंस के लिए तीन माह से बजट नहीं मिला है। इस कारण एंबुलेंस का रखरखाव ठीक नहीं हो पा रहा है। बजट के अभाव में घिसे टायरों पर ही एंबुलेंस चलाई जा रही है। टायर घिसे होने की वजह से 108 एंबुलेंस का टायर पंक्चर हुआ। इसके अलावा 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों को भी तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इस कारण कर्मचारियों में सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है।
जिला अस्पताल की तीन एंबुलेंस हो गईं खटारा
जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल की तीन एंबुलेंस खड़े-खड़े और मेंटिनेंस के अभाव में खराब हो गई हैं। अस्पताल प्रशासन भी 108 पर ही निर्भर है। ऐसे में गंभीर बीमार लोगों को रेफर के लिए अस्पताल से रेफर की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिला मुख्यालय के लिए एक एंबुलेेंस नाकाफी
ऊधमसिंह नगर के जिला मुख्यालय में एकमात्र में 108 एंबुलेंस सेवा नाकाफी साबित हो रही है। इससे मरीजों और घायलों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वर्तमान में जिले में आठ 108 एंबुलेंस वाहन चल रहे हैं। लोगों का कहना है कि केवल रुद्रपुर में ही कम से कम तीन एंबुलेंस होनी चाहिए।