गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की संपत्तियों को लेकर धार्मिक डेरा कारसेवा और गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के बीच पनप रहे विवाद को लेकर प्रशासन ने दोनों पक्षों की बैठक ली। इसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष में दावे प्रस्तुत किए। सोमवार को एसडीएम निर्मला बिष्ट ने दोनों पक्षों से जमीनी विवाद को न्यायिक स्तर पर निपटाने तथा क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
उप तहसील नानकमत्ता में हुई बैठक में गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, महासचिव प्रीतम सिंह संधू केहर सिंह सहित आठ सदस्यों ने डेरा कारसेवा द्वारा फर्जी गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी न्यास बना कर संपत्तियों पर कब्जे के आरोप लगाए। इधर, डेरा कारसेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह के साथ कमेटी के सदस्यों ने एसडीएम को अपने पक्ष में वर्ष 2010 तथा 2012 में खटीमा न्यायालय तथा अपर सत्र न्यायाधीश रुद्रपुर द्वारा दिए गए निर्णय की प्रति सौंपी। उन्होंने कहा कि पहले भी हम पर आरोप लग चुके हैं लेकिन जांच में आरोप सिद्ध न हो पाए। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन सचिव उपकार सिंह ने वर्ष 1998 में डेरा कारसेवा को डेरे के लिए भूमि दान की थी।
2005 में गुरुद्वारा दूध वाला कुआं, गुरुद्वारा रीठा साहिब चंपावत तथा गुरुद्वारा साहिब बागेश्वर के लिए न्यास का गठन किया गया था जो पंजीकृत है। एसडीएम ने दोनों पक्षों से क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा भूमि विवाद का मामला न्यायिक स्तर पर निपटाने को कहा। वहां सीओ कमला बिष्ट, उप तहसीलदार योगेश वर्मा, थानाध्यक्ष नरेश पाल सिंह, कमेटी के सदस्य धन्ना सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू ,परगट सिंह ,हरविंदर सिंह ,हरचंद सिंह, हीरा सिंह, अजीत सिंह, जसवंत सिंह, बख्शीश सिंह ,अमरजीत सिंह सेठी, जत्थेदार गुरमेज सिंह ,अमरजीत सिंह विर्क, जसवीर सिंह आदि थे।