भविष्य में प्रतिवर्ष से पांच से 10 मिनी फॉरेस्ट तैयार करने का लक्ष्य
डॉ. पंत बताते हैं कि अपने पिता सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लगातार अपने वेतन से पर्यावरण संरक्षण का प्रयास करते आ रहे हैं। उन्होंने प्रत्येक वर्ष 20,000 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी अपनी भूमि पर लगाने के लिए निशुल्क पौधे भेंट करते हैं।
अब तक 3,72,000 पौधे लगवा चुके हैं। वह कहते हैं इस तरह लोग कई जगह मिनी फॉरेस्ट बनाएं तो ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ने से वायुमंडल भी स्वच्छ होगा। उनका भविष्य में प्रतिवर्ष से पांच से 10 मिनी फॉरेस्ट तैयार करने का लक्ष्य है।
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क्या है मियावाकी तकनीक
डॉ. आशुतोष पंत ने बताया कि मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने खोजी थी। इसमें पौधों को बहुत कम जगह में पास-पास रोपा जाता है। पौधों में तीव्र प्रकाश संश्लेषण होता है। खाद-पानी की अच्छी व्यवस्था होने पर पौधे चार-पांच गुना तेजी से बढ़कर बहुत जल्दी जंगल का स्वरूप ले लेते हैं। पौधे कम स्थान घेरने के साथ ही दूसरे पौधों की वृद्धि में भी सहायक होते हैं।