फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अन्नपूर्णा की चाह में औपचारिकता के बीज

विज्ञापन
पंतनगर में कृषि विभाग के स्टॉल पर बरेली से पहुंचे किसान। संवाद - फोटो : RUDRAPUR
विज्ञापन
पंतनगर। किसान मेले के पहले दिन सुबह 11 बजे के बाद पहुंचे किसान गेहूं की एचडी-2967 व डीबीडब्ल्यू-187 प्रजाति के बीजों के लिए भटकते दिखाई दिए।
विज्ञापन

दरअसल सीआरसी में बीजों की बिक्री बीती 12 अक्तूबर से ही शुरू हो गई थी जिससे उनके पास इन बीजों की उपलब्धता खत्म हो गई और बीज आपूर्ति का दबाव एसपीसी पर आ गया। इसलिए एसपीसी को इन प्रजातियों का बीज रुक-रुक कर बिक्री करना पड़ा।
किसान मेले में विवि के बीजों पर 15 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। पहले दिन दूरदराज से विश्वसनीय रबी फसलों के प्रजनक बीजों की चाह में किसान सुबह ही यहां पहुंच गए। इन किसानों ने तो मनचाहे बीजों की खरीदारी कर ली लेकिन 11 बजे के बाद पहुंचने वाले किसानों को बहुत देर तक भटकना पड़ा। बीज लेने के
विज्ञापन

लिए विवि के सीआरसी व एसपीसी स्टॉलों पर किसानों की लगभग सौ-सौ मीटर लंबी लाइनें शाम तक लगी रहीं। कुछ किसान मायूस होकर अन्य प्रजातियों के बीजों की खरीदारी कर घर लौट गए।
परिचर्चा
यूपी में बदायूं जिले के बिल्सी से 12 लोगों के दल में धर्मवीर सिंह, आशीष चौधरी व सतपाल सिंह ने बताया कि वे लोग रविवार की शाम ही मेले में पहुंच गए थे। सोमवार सुबह आठ बजे पहुंचकर उन्होंने गेहूं की 2967, 187, लाही व चने की पीजी-3 प्रजाति के बीज खरीदे। इस बार मेले को व्यवस्थित तरीके से लगाया गया है इसलिए स्टाल ढूंढने में परेशानी नहीं हुई।
आगरा से पांच लोगों के दल में आए रणबीर सिंह व बलवीर सिंह ने बताया कि उन्हें गेहूं की 2967 सहित मनचाहे प्रजातियों के बीज मिल गए हैं। कुछ सब्जियों व फल के पौधे लेकर मेला घूमेंगे और घर लौट जाएंगे। पंतनगर प्रशासन मेले को सही समय और किसानों की सहूलियत के हिसाब से लगाता है। मेला प्रबंधन की व्यवस्थाएं बेहतर है।
वसुंधरा, एटा (यूपी) से 14 लोगों के दल में आए देवेंद्र सिंह को गेहूं की 2967 व 187 प्रजाति के बीज नहीं मिल पाए जिससे वह लोग निराश हैं। परेशानी तब हुई जब दो घंटे लाइन में लगने के बाद उनका नंबर आया तो कह दिया गया कि इस प्रजाति का बीज खत्म हो गया है। शाम तक बीज नहीं मिलने पर वह एचडी-3086 प्रजाति का बीज ले जाएंगे।
नरेंद्रपुर, मुरादाबाद (यूपी) से आए बलवीर सिंह और प्रवीण ने गेहूं की 2967 प्रजाति के बीज नहीं मिलने से निराश होकर अन्य प्रजाति के बीज खरीदे। उन्होंने दुखी मन से बताया कि वे लोग 26 वर्षों से किसान मेले में शिरकत करते आ रहे हैं। इस बार 2967 बीज के लिए सीआरसी स्टॉल ने असमर्थता जता दी। उसके बाद एसपीसी के स्टॉल पर भी नहीं मिले।
लहटोई (अलीगढ़) से आए किसान पवन राघव व राजू ने बताया कि उन्हें गेहूं की 2967 प्रजाति के डेढ़ क्विंटल व 187 प्रजाति के 50 किलो बीज की दरकार थी। सुबह से कई बार लाइन में लगने के बाद शाम साढ़े तीन बजे तक एक क्विंटल 2967 व 187 का 40 किलो बीज मिल पाया है। उन्होंने व्यवस्थित मेले के लिए मेला प्रबंधन की सराहना की।
50 वर्ष में पहली बार नहीं बिके टीडीसी के बीज
पंतनगर। पिछले 50 वर्षों से पंतनगर में आयोजित होने वाले किसान मेले में उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम (टीडीसी) अपना स्टॉल लगाकर किसानों को बीज मुहैया कराता रहा है। सूत्रों के अनुसार इस बार धनाभाव के चलते मेले में टीडीसी स्टॉल नहीं लगा है। सिर्फ नाम के लिए कृषि विभाग के स्टॉल पर टीडीसी के कुछ कर्मचारी बैठे दिखाई दिए जहां बीज का नामोनिशान नहीं था। स्टॉल पर मिले देवचरा बरेली के किसान छोटे सिंह, महिपाल, अलंकार, बहुरंग सिंह और राम नरेश ने बताया कि वे शुरू से ही टीडीसी के ही बीज खरीदते आए हैं। इस बार स्टॉल नहीं लगने से निराशा हुई है। अब वह हल्दी जाकर टीडीसी की सोसाइटी से बीज खरीदेंगे। संवाद
विज्ञापन

मेले से विवि फार्म का स्टाल भी नदारद
पंतनगर। प्रत्येक किसान मेले में शिरकत करता रहा विवि फार्म का स्टॉल भी इस बार नदारद रहा। सूत्रों के अनुसार फार्म निदेशालय के पास वर्तमान में साढ़े चार हजार एकड़ कृषि भूमि है। इसमें से उसने करीब 3900 एकड़ भूमि लीज पर दे रखी है। शेष लगभग 600 एकड़ भूमि पर निदेशालय बीजोत्पादन कराता है। इस बीज को वह पहले ही टीडीसी को हस्तांतरित कर चुका है और अब उसके पास बीज ही नहीं बचा है इसलिए स्टॉल नहीं लगाया गया है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें