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बेमौसमी धान की फसल से जल स्तर में गिरावट

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खटीमा के प्रतापपुर गांव में बेमौसमी धान की रोपाई के लिए पौध उखाड़ते लोग - फोटो : KHATIMA
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क्षेत्र के कई गांवों में बेमौसमी धान की फसल लहलहा रही है। गिरते जल स्तर को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इस फसल पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया। अलबत्ता इस बार बेमौसमी धान की फसल पर रोक नहीं लग पाई।
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ब्लॉक के प्रतापपुर सहित कई गांवों में लोगों ने बेमौसमी धान लगाया है। आलू एवं मटर की फसल से निपटने के बाद किसान तीन माह मार्च, अप्रैल एवं मई अंतिम सप्ताह तक जल्दी तैयार होने वाली चैनी धान की फसल उगा लेते हैं। बेमौसमी धान में पानी की अधिक जरूरत बतायी जाती है। किसान बेमौसमी धान के खेतों में दिन-रात पानी छोड़ते हैं।
जल स्तर हो रहा कम : पांडे
खटीमा। सहायक कृषि अधिकारी विवेक पांडे बताते हैं कि फिलहाल बेमौसमी धान के संबंध में शासन से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया किसान गर्मी के सीजन में बेमौसमी फसल लेने में पानी का दुरुपयोग करते हैं। इससे जल स्तर निरंतर गिरने लगा है। संवाद
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शासन के निर्देशों से किसानों को अवगत कराया जा चुका है। लेकिन इसके बाद भी किसान स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे है। फिलहाल मौजूदा स्थिति से शासन को अवगत कराया जा चुका है।
-निर्मला बिष्ट, एसडीएम
आबादी के बीच न करें गेहूं की गहाई
खटीमा। थ्रेशर से गेहूं निकालते समय प्रशासन ने सावधानियां बरतने की हिदायत दी हैं। एसडीएम निर्मला बिष्ट ने गेहूं निकालते समय उड़ने वाली भूसी का रूख निर्जन दिशा की ओर करने के निर्देश जारी किए। कहा कि सावधानियां बरतने के साथ ही गेहूं गहाई का कार्य आबादी के बीच और सड़क के पास न करें। साथ ही उड़ने वाली भूसी जन असुविधा का कारण न बने। संवाद
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