काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी का चैती मेला समापन होने के बाद मंदिर परिसर में लगाए गए सीलबंद दानपात्रों को प्रशासन की देखरेख में खोला गया। तहसील प्रशासन की टीम ने नौ घंटे में 12 दानपात्रों में एकत्र चढ़ावे की गणना की जिसे उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में पंडा परिवार में वितरित किया गया।
चैती मेला 19 मार्च से शुरू हुआ था जबकि देवी का डोला 25 मार्च की अर्धरात्रि चैती मंदिर स्थित गर्भगृह पहुंचा था। वहीं मेला बीती 24 अप्रैल को समाप्त हुआ था। मेला प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेश पर देवी डोला आने से पहले 23 मार्च को तहसील प्रशासन की देखरेख में मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर रखे 12 दानपात्रों को सील कर दिया था।
शनिवार को मंदिर परिसर में सील बंद दानपात्रों को तहसीलदार पंकज चंदोला के निर्देश पर नायब नाजिर नीरज कुमार उपाध्याय और पंडा परिवार की देखरेख में खोला गया।
मंदिर परिसर के नवनिर्मित हॉल में तहसील की 16 सदस्यीय टीम ने सीसीटीवी और पंडा परिवार के सामने सुबह दस बजे से दानपात्रों में आए दान की गणना शुरू की जो शाम साढ़े छह बजे तक चली। मेला मजिस्ट्रेट व एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश अनुपालन में मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों से प्राप्त धनराशी को पंडा परिवार में हिस्से के मुताबिक बांट दी जाती है।
वहां मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री, सहायक प्रधान पंडा मनोज अग्निहोत्री, कृष्ण गोपाल अग्निहोत्री, वंदना अग्निहोत्री, संदीप अग्निहोत्री, संदीप अग्निहोत्री, शिवा अग्निहोत्री, विवेक अग्निहोत्री, शक्ति अग्निहोत्री मौजूद रहे।