आम आदमी पार्टी के आह्वान पर गन्ना किसानों ने बंद हो चुकी काशीपुर शुगर मिल पर चार साल से बकाया 27 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग को लेकर संयुक्त गन्ना आयुक्त कार्यालय का घेराव कर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में संयुक्त गन्ना आयुक्त को जबरन साथ लेकर एनएच पर सांकेतिक धरना दिया। बाद में सामूहिक गिरफ्तारी देने की मांग को लेकर आईटीआई चौकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई। एसडीएम ने नायब तहसीलदार के माध्यम से किसानों को बुधवार को अपने कार्यालय में वार्ता को आमंत्रित किया, तब किसान वापस लौटे।
आम आदमी पार्टी के किसान संगठन उत्तराखंड किसान मोर्चा के अध्यक्ष जितेंद्र मलिक के नेतृत्व गन्ना किसान 31 अगस्त को दिए गए एल्टीमेटम के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे गन्ना आयुक्त कार्यालय पहुंच गए। गन्ना आयुक्त के नहीं मिलने पर किसान संयुक्त गन्ना आयुक्त डा. योगेंद्र कुमार के कार्यालय में गए। उनसे किसानों ने वर्ष 2011-12 का बकाया 27 करोड़, ब्याज सहित करीब 35 करोड़ का भुगतान करने की मांग की। डा. योगेंद्र के यह कहने पर कि अदालत के आदेश पर भुगतान लिक्युटेटर द्वारा मिल को नीलाम करने पर होगा। इस पर किसान भड़क गए और मुख्यमंत्री सहित अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। किसान डा. योगेंद्र को जबरन अपने साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ले आए और अपने साथ उनको भी धरने पर बैठाया। किसान नेताओं ने कहा भुगतान दो अपने अधिकारी ले जाओ।
इस बीच किसानों ने दो बार जाम खोलकर वाहनों को जाने दिया। संयुक्त गन्ना आयुक्त ने गन्ना आयुक्त से फोन से बात की और किसानों की मांग से उन्हें अवगत कराया। संयुक्त गन्ना आयुक्त ने किसानों को बताया कि आयुक्त इस संबंध में सरकार से बात चल रही है। इधर, धरने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दो बजे किसान आईटीआई थाना में गिरफ्तारी देने गए। एसडीएम के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे नायब तहसीलदार ने किसानों को बताया कि बुधवार को सुबह 11 बजे एसडीएम ने अपने कार्यालय में आमंत्रित किया है। इस पर किसान लौट गए। प्रदर्शन करने वालों में आम आदमी पार्टी के पर्यवेक्षक त्रिलोक सिंह, श्रीचंद्र बोरा, गुलशन कुमार, करन सिंह, आरएस राणा, जीएस गिल एसएस क्लेयर आरडी खान, प्रवीण कुमार, केके जोशी, कैलाश नाथ सिंह, जीएस चीमा, चंग्पाल सैनी, दिवान सिंह कटयार, अली हुसैन, रणवीर सिंह आदि थे।