सितारगंज के लौका गांव के शिव मंदिर के महंत का शव सड़क किनारे कुचला पड़ा मिला। परिजनों और ग्रामीणों ने मंदिर की विवादित भूमि के मामले में विपक्षियों द्वारा हत्या किए जाने की आशंका जताई। वहीं, पुलिस मामले को प्रथम दृष्टया सड़क हादसा बता रही है। पूर्व विधायक नारायण पाल ने भी घटना में हत्या का संदेश व्यक्त किया।
सोमवार की रात करीब 9:08 बजे लौका गांव में हाइवे किनारे स्थित शिव मंदिर के महंत बाबा भोलागिरी उर्फ रामवृक्ष प्रसाद (87) पुत्र स्व. जमुना प्रसाद आरके ढाबा से खाना लेकर मंदिर लौट रहे थे। जैसे ही वह मंदिर के पास पहुंचे तो अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे गीली मिट्टी में बने टायरों से स्कॉर्पियो व बोलेरो द्वारा उन्हें कुचलना प्रतीत होता है। मृतक बाबा के भतीजे श्याम नारायण ने बताया कि वाहन ने पहले टक्कर मारी और उनके ताऊ बाबा भोलागिरी पर दुबारा गाड़ी चढ़ाकर कुचला गया है। इससे उनकी मौत हुई। बताया कि ताऊ पिछले 40 साल से मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं। मंदिर की जमीन को लेकर भूमि विवाद भी चल रहा है।
आरोप लगाया कि उनकी सड़क हादसे में मौत नहीं है, वरन उन्हें षडय़ंत्र के तहत कुचलकर उनकी हत्या की गई है। कहा कि कुछ दिन पहले कुछ लोग बाबा के पास आए थे। कागज मांगते हुए उनसे कहा भी कि मामले को रफादफा कर लेते हैं। बताया कि बाबा पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। वर्ष 2000 में भी चाकू मारा गया था। पुलिस के समझाने के बाद भी ग्रामीणों ने गहरा आक्रोश जताया और करीब दो घंटे तक सड़क पर ही शव पड़ा रहने दिया।
घटना के बाद मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक नारायण पाल ने भी घटना में हत्या का संदेह व्यक्त किया। कहा कि महंत भोलागिरी महाराज को बार-बार धमकाया जाता था। कुछ धार्मिक लोग है। जिनका षडय़ंत्र लग रहा है और बाबा की एक्सीडेंट में मौत नहीं, बल्कि उनको मारा गया है। कहा कि सुबह आठ बजे इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ग्रामीण एकत्रित होंगे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। पूर्व विधायक पाल के समझाने के बाद ग्रामीण मान गए। इधर, एसएसआई बीएस बिष्ट ने प्रथम दृष्टया सड़क हादसे में मौत होना बताया है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। खबर लिखे जाने तक पोस्टमार्टम की कार्रवाई नहीं हुई थी।