जीबी पंत कृषि विवि पंतनगर के मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक मधुमक्खियों को बचाने के लिए नित नए समाधान ढूंढ़ रहे हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों को ततैयों से बचाने के लिए वैस्प गार्ड नामक यंत्र विकसित किया है। जो मौन पालकों की सबसे बड़ी समस्या का हल बन सकता हैं। विवि की ओर से इस नवाचार का पेटेंट फाइल कर दिया गया है।
जब भी खेती की बात होती है, तो लोगों के मन में ट्रैक्टर, बीज, खाद या सिंचाई की तस्वीर उभरती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अच्छी पैदावार में मधुमक्खियों का बहुत बड़ा योगदान है। मधुमक्खियां केवल शहद और मोम ही नहीं देतीं, बल्कि फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मधुमक्खियां कमजोर पड़ जाएं तो खेती और पर्यावरण दोनों पर बहुत विपरीत असर पड़ता है। मौन पालकों की सबसे बड़ी समस्या है जुलाई से अक्टूबर के बीच मधुमक्खियों पर ततैया (बर्र) का हमला। ये बर्र मधुमक्खियों पर हमला करके उन्हें मार देते हैं। सारे मौन पालक इस समस्याओं से परेशान थे, लेकिन उनके पास कोई आसान और सस्ता समाधान नहीं था। पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और वैक्स गार्ड विकसित कर समाधान खोज निकाला है। अब वैज्ञानिक इस तकनीक के पेटेंट के बाद किसी औद्योगिक संस्थान से अनुबंध कर व्यावसायिक उत्पादन कर बाजार में उतारने की तैयारी में हैं।
मधुमक्खियों पर ऐसे हमला करते हैं ततैये
ऐसे ईजाद हुआ वैक्स गार्ड
जब बर्र के हमले लगातार बढ़ने लगे, तब कीट विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. मल्ल ने इस समस्या पर गंभीरता से काम शुरू किया। उन्होंने बर्र के व्यवहार, उसके हमले के तरीकों और उससे मधुमक्खियों पर होने वाले असर का अध्ययन किया। फिर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. वीके सिंह, डाॅ. जलज शर्मा और उनकी टीम को भी इस काम से जोड़ा। कई प्रयोग और डिजाइनों पर काम करने के बाद वैस्प गार्ड तैयार हुआ। यह एक सस्ती (मात्र 150-200 रुपये) तकनीक है, जो मधुमक्खियों को बर्र के हमलों से बचाने में मदद करती है। इसे मौन पालकों की जरूरत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
ऐसे काम करता है वैक्स गार्ड