रुद्रपुर। सिडकुल प्रबंधन के मनमाने रवैये से श्रमिकों के शोषण की इंतहां हो चुकी है। सांठगांठ से श्रमिकों की बेसिक सैलरी कम दिखाकर ईपीएफ की चोरी की जा रही है। इससे श्रमिकों के खाते में पूरी धनराशि जमा नहीं हो रही है तो वहीं सरकार को चूना लगाया जा रहा है।
श्रमिकों को हर माह मिलने वाले मूल वेतन से 12.5 फीसदी धनराशि काटकर और 12.5 फीसदी की दर से ही प्रबंधन को भी कर्मचारी/श्रमिक के ईपीएफ खाते में जमा कराना होता है। यह श्रमिक हित के मद्देनजर किया जाता है। मगर सूत्रों के अनुसार प्रबंधन ने इस सिस्टम में भी रकम डकारने और श्रमिकों के शोषण का रास्ता तलाश लिया है। सूत्रों के अनुसार हर माह जमा की जाने वाले ईपीएफ धनराशि नियमित अंतराल में जमा नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा श्रमिकों के मूल वेतन के आधार पर 12.5 फीसदी की रकम प्रबंधन काट तो लेता है। मगर आपसी सांठगांठ से मूल वेतन को कम दर्शाकर पीएफ दफ्तर में उसी अनुपात में जमा कराया जाता है। इससे श्रमिक के वेतन से धनराशि तो अधिक काट ली जाती है और जमा कम की जाती है। मसलन किसी श्रमिक की आठ हजार की बेसिक सैलरी के अनुसार 12.5 फीसदी के हिसाब से एक हजार रुपए काटकर जमा होने चाहिए। लेकिन सांठगांठ से श्रमिक की सैलरी छह हजार दिखाकर 12.5 फीसदी के हिसाब से 750 रुपए ही जमा किए जाते हैं। इससे साफ तौर पर हर माह एक श्रमिक के खाते से 250 रुपए ईपीएफ रकम की चोरी हो जाती है। जबकि सिडकुल में ठेकेदार के अधीन काम करने वाले श्रमिकों को जोड़कर करीब सवा लाख श्रमिक काम करते हैं। इस संबंध में सहायक श्रमायुक्त पीसी तिवारी का कहना है कि हमारा काम न्यूनतम वेतन की जांच करना है। यदि न्यूनतम वेतन में कटौती की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।