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दिवाली में पटाखों से परहेज करें तो अच्छा

Mon, 20 Oct 2014 05:34 AM IST
Udham singh nagar
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सितारगंज। दिवाली दीये जलाकर रोशनी करने का पर्व है, लेकिन इस अवसर पर पटाखे जलाने का रिवाज बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो पटाखे बनाने में प्रयुक्त पोटाश और सल्फर आंखों और त्वचा के लिए बेहद हानिकारक है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अभिषेक बंसल बताते हैं कि इन दो पदार्थों के आंख में घुस जाने से रेटिना डिटेचमेंट (आंख के परदे पर गंभीर चोट लगना), कार्नियल बर्न और हाईफीमा (आंख से खून आना) आदि गंभीर रोग हो सकते हैं। इन रोगों से आपकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी डा. हर्ष सिंह ऐरी कहते हैं कि पटाखे जलाने से उसका जहरीला धुआं एलर्जी पैदा करता है। जिसमें अस्थमा, क्रॉनिक ब्रॉन काईटिस (फेफड़ों की बीमारी) होती है। -पटाखे जलाने से पूर्व दो बाल्टी पानी पास रखें।
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-पटाखे का बारूद आंख में जाने पर तत्काल 10-15 मिनट ताजे पानी से आंखों को धोएं।
-नजदीकी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें और उसका तुरंत इलाज कराएं।
-त्वचा जलने पर ठंडे (बर्फ या फ्रिज के पानी) से जली हुई त्वचा को 15-20 मिनट तक धोएं।
-नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराएं।
-खुली जगह में पटाखे जलाएं।
-अभिभावकों की गाइडेंस के मुताबिक ही बच्चे पटाखे जलाएं। रेटिना डिटेचमेंट में आंख का परदा पटाखे की चोट लगने से उखड़ जाता है। जिससे आंख की रोशनी चली जाती है। जबकि आंख की नस दबने से एक्स्ट्रा ऑक्यूलर मशल पैरालिसिस बीमारी हो जाती है। इसमें व्यक्ति को आंख से दो-दो वस्तु दिखाई देती है। यह रोग सुगर से आंख की नस खराब होने और एक्सीडेंट में आंख की नस दबने से होता है।
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