रुद्रपुर। मां अटरिया देवी मंदिर की महंत माता पुष्पा देवी ने बताया कि 1200 ई. में मुगल शासन के दौरान मां अटरिया की मूर्ति खंडित कर कूड़े में फेंक दी गई थी। 1600 ई. में राजा रुद्रप्रताप सिंह (जिनके नाम पर रुद्रपुर शहर का नाम है) जब जंगल में शिकार के लिए गए तो उनके रथ का पहिया गड्ढे में फंस गया। इस कारण उन्हें जंगल में रात गुजारनी पड़ी। रात में राजा को सपने में मां अटरिया दिखाई दीं। उन्होंने कहा कि गड्ढे के नीचे कुएं में मैं विराजमान हूं। मुझे निकलवाकर बाहर लाओ। राजा ने सुबह होते ही उस स्थान की खुदाई कराई। जहां मां अटरिया (मंशा देवी) की मूर्ति निकली। इसके बाद राजा ने उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराकर मूर्ति की स्थापना कराई। यह अब अटरिया मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि चैत्र माह की अष्टमी में माता का डोला मंदिर आता है। वैशाखी के बाद यहां महीने भर मेला लगता है।