रुद्रपुर। सर्दियों में भी उद्योगों को बिजली संकट से निजात नहीं मिल पाई है। अब भी रोजना आठ-आठ घंटे बिजली की अघोषित कटौती हो रही है जिससे उद्योगों में चालीस फीसदी उत्पादन प्राभवित हो रहा है और उद्योगपति हलकान हैं। सरकार ने सितारगंज में सिडकुल फेस-टू का विस्तार करके भले ही देश के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया हो। मगर बिजली की व्यवस्था में तनिक भी सुधार न होने से जिले में सिडकुल की करीब एक हजार इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके चलते औद्योगिक इकाइयां घाटे में जा रही हैं।
उद्योगपति पीके मंगला का कहना है कि सरकार ने हद कर दी। बिजली के जाने और आने का समय नहीं रह गया है। स्थानीय अफसर ऊपरी कटौती बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। सुनवाई नहीं होने से उद्योगों को चलाना मुश्किल हो रहा है। यूपी में बिजली व्यवस्था ठीक न होने के बाद इंडस्ट्रियल एरिया को नो कटौती जोन घोषित किया गया है। इसी तर्ज पर सरकार यहां भी इंडस्ट्रियल एरिया को कटौती से मुक्त करना चाहिए।
चार दिन में हुई काटौती
19 नवंबर : सुबह 6.00 से 10 बजे तक और शाम 5.30 से रात 10.15 तक
20 नवंबर : सुबह 5.30 से 7.10 बजे तक और रात 9.00 से 10.00 तक
21 नवंबर : दोपहर 1.10 से 1.46 बजे तक, शाम 7.20 से 10.20 तक। रात 12.15 से 22 नवंबर की सुबह 7.05 बजे तक
22 नवंबर : दोपहर 3.30 से शाम 5.30 बजे तक
-बिजली कटौती की वजह से उद्योगों में 40 फीसदी उत्पादन प्रभावित हो रहा है। बिजली के जाने का समय बताया जाता है और आने का पता नहीं होता है। कटौती होती है कुछ, बताया जाता है कुछ और। कटौती में अगर सुधार नहीं हुआ तो पलायन को उद्योग विवश होंगे। अजय तिवारी, अध्यक्ष सिडकुल वेलफेयर एसोसिएशन।
जब भी देहरादून जाते हैं केजीसीसीआई की समस्याओं में बिजली का संकट मुख्य एजेंडा होता है। मगर हर बार बिजली की दो-चार नई योजनाओं के शुरू किए जाने का हवाला दे करके टरका दिया जाता है। बगैर किसी सूचना के आठ से दस घंटे तक की जा रही कटौती से उद्योगपति उद्योग नहीं चला पा रहे हैं। पहले तो गर्मी में खपत अधिक होने के हवाला दिया जाता है और अब सर्दियों में भी बिजली का संकट बरकरार है। विकास जिंदल, अध्यक्ष केजीसीसीआई
बिजली कटौती को लेकर जिस तरह की सूचना मिलती है, उससे औद्योगिक इकाइयों को अवगत करवाया जाता है, जब सूचना नहीं मिलती है तो वह विवश होते हैं। संजय कुमार, एसडीओ सिडकुल