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पुलिस बरते सतर्कता तो न हो हत्याएं

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Udham singh nagar
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रुद्रपुर/खटीमा। फुलैया हत्याकांड हो या किच्छा कोतवाली क्षेत्र में जोगेंद्र हत्याकांड या फिर काशीपुर में तीन लोगों की हत्या। इन सभी हत्याओं के पीछे प्रमुख वजह पुलिस की उदासीनता ही रही है, क्योंकि लोग अपनी जानमाल की सुरक्षा के साथ ही हत्या किए जाने की आशंका भी पुलिस से जताते हैं और बाकायदा लिखित में प्रार्थना पत्र भी पुलिस को देते हैं। बावजूद इसके पुलिस जमीनी विवाद से जुड़े मामले को गंभीरता से नहीं लेती है। इसके पीछे की वजह लोग पुलिस की भू-माफियाओं से सांठ-गांठ बताते हैं। इस वर्ष जिले में हुई करीब 45 हत्याओं में 50 प्रतिशत मामले जमीनी विवाद से जुड़े हुए हैं। ऊधम सिंह नगर में सिडकुल स्थापना के बाद तराई की जमीनों की कीमत आसमान को छूने लगी। यहीं से भूमि विवादों में फायरिंग, खूनी संघर्ष व हत्याओं का सिलसिला चल पड़ा। बावजूद इसके जिला व पुलिस प्रशासन भूमि संबंधी विवादों को निपटाने के लिए कोई ठोस पहल शुरू नहीं कर पाया। पुलिस आंकड़ों पर ही गौर करें तो इस वर्ष जिले में 45 हत्याएं हो चुकी हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत हत्याएं भूमि विवाद के चलते हुई हैं। जनपद में जमीन को लेकर होने वाले हत्याकांड में काशीपुर का मामला पहला नहीं है। गत वर्ष 18 नवंबर को खटीमा विकास खंड के फुलैया गांव में भी दो थारु जनजाति के किसानों की 80 बीघा जमीन को लेकर दिन दहाड़े हत्या हुई थी। जिसमें जनजाति के किसान विजय बहादुर , भरत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इधर किच्छा तहसील क्षेत्र में भी भूमि विवाद के चलते बीते दो अक्टूबर को ग्राम रामपुरा थाना किच्छा निवासी कृषक (70) वर्षीय जोगेंद्र की भी धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। जमीन से जुड़े इन तमाम हत्याकांड से पूर्व किसान एसडीएम, पुलिस क्षेत्राधिकारी से मिलकर अनहोनी की आशंका व्यक्त कर चुके थे। लेकिन पुलिस ने इन मामलों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। इससे पूर्व भी खटीमा तहसील क्षेत्र में जमीन को लेकर हुए हत्याकांडों में भूड़ के सर्कस ग्राउंड की जमीन को लेकर हुए विवाद में वर्ष 1983 में संतोष बंसल की हत्या हो गयी थी। फुलैया से लगे रतनपुर गांव में भी दो सगे भाईयों की पानी निकासी को लेकर डाले जा रहे पाइप के विवाद में फौजी दीवान सिंह, रमेश सिंह की हत्या हो गयी थी। जबकि नौगंवा पटिया में जमीन के पारिवारिक विवाद में सुग्रीव सिंह, ओम प्रकाश, रुक्मणी की हत्या हो गयी थी। इधर मंगलवार को काशीपुर में जमीनी विवाद को लेकर हुई तीन हत्या से साबित हो गया है कि जिले में जमीनी विवाद में फायरिंग, खूनी संघर्ष व हत्या जैसी वारदातें पुलिस व जिला प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रही हैं।
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तराई में खड़ा हुआ भूमाफियाओं का नेटवर्क
रुद्रपुर/खटीमा। राज्य बनने और फिर सिडकुल स्थापना के बाद तराई की जमीन के दामों में उछाल से जिले में भूमाफियाओं का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है। कोतवाली, तहसील, उपजिलाधिकारी कार्यालय में अक्सर भूमाफिया किसी न किसी जमीन के मामले को लेकर राजनैतिक दलों के नेताओं के साथ घूमते नजर आते हैं। लेकिन प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेती। यहीं कारण है कि बाद में जमीनी विवाद काशीपुर, फुलैया जैसे हत्याकांड के रूप में सामने आता है।
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