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किसकी नजर लग गई महेंद्र के परिवार को

Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
Udham singh nagar
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खटीमा। श्रीपुर बिचुवा के हंसते खेलते परिवार को न जाने किसकी नजर लगी कि परिवार के तीनों बच्चों की एक के बाद एक आंखों की रोशनी चली गई। हालांकि, करीब दो माह बाद पुत्री के आंखों की रोशनी तो लौट आई, लेकिन दो भाइयों को अब भी नहीं दिखाई देता। वहीं, आंखों की रोशनी जाने से दोनों भाई इंटरमीडिएट और हाईस्कूल की परीक्षा से वंचित रह गए। परिवार के मुखिया ने सामर्थ्य के अनुसार दोनों पुत्रों का इलाज भी कराया। आश्चर्यजनक बात है कि चिकित्सक दोनों की आंखें ठीक बताते हैं।
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श्रीपुर बिचुवा निवासी महेंद्र सिंह राणा का बड़ा बेटा अजय राणा वर्ष 2010 में 12वीं की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परीक्षा के दो माह का समय बचा था कि उसे धुंधला दिखाई देने लगा और एक सप्ताह के भीतर ही उसे दिखना बंद हो गया। परिणामस्वरूप वह परीक्षा नहीं दे सका। महेंद्र सिंह का परिवार अजय की आंखों के इलाज के लिए इधर-उधर भाग दौड़ करता रहा कि इसी दौरान वर्ष 2011 में उसके छोटे बेटे सत्यम सिंह की आंखों की रोशनी भी अचानक गायब हो गई, तब वह दसवीं की परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था। इतना ही नहीं कुछ दिन बाद उसकी बेटी स्नेहलता के आंखों की रोशनी भी जाती रही। वह बताती हैं कि उसे ऐसा महसूस होता था कि उसकी आंखें बाहर निकल रही हैं और कुछ बाहर की ओर आ भी गई थी, लेकिन करीब दो माह बाद उसकी आंखों की रोशनी लौट आई। तीनों बच्चों को लेकर राणा परिवार बेहद चिंतित है। पिता महेंद्र और माता इमलावती देवी-देवताओं और झाड़-फूंक के साथ ही उनका आसपास के अस्पतालों के अलावा सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी में भी उपचार करा चुके हैं, जबकि चिकित्सक उनकी आंखों में किसी प्रकार की खराबी से इनकार करते हैं।

शासन-प्रशासन गंभीरता से ले तो लौट सकती है खुशियां
खटीमा। श्रीपुर बिचुवा के ग्राम प्रधान रमेश महर बताते हैं कि इस परिवार की समस्या कई बार जनता दरबार में उठाई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। सामर्थ्य तक उपचार कराने के बाद अब परिजन झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े हैं। उन्होंने कहा यदि शासन-प्रशासन मामले को गंभीरता से लेता तो शायद इस परिवार की खुशियां लौट आती।
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