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राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस में वैज्ञानिकों ने की महत्वपूर्ण संस्तुतियां

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पंतनगर में प्रकृति संरक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सस्य विज्ञान का पुनर्रूपांकन विषय पर हुई कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिकों की ओर से मृदा स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए मृदा में उपस्थित लाभदायक सूक्ष्म जीवों को जैव उर्वरक के रूप में प्रयोग करने, उनकी संख्या में वृद्धि करने के उपाय करना आदि की संस्तुति की गई।
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पंत विवि के सस्य विज्ञान विभाग एवं सस्य विज्ञान समिति की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस का समापन हुआ। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, कृषि वानिकी, पशुपालन के साथ समन्वित खेती को बढ़ावा देना, सूखा, अम्लता, उच्चताप आदि अजैविक कारकों के प्रति पौधों में अवरोध उत्पन्न करने के लिए तकनीकों का विकास की संस्तुति की।
इसके अलावा खरपतवारों से उत्पन्न तनाव के कारण उत्पादन में होने वाली 35 से 40 प्रतिशत कमी को रोकने के लिए खरपतवार नियंत्रण कार्यक्रमों में व्यापक प्रभाव वाले रसायनों के साथ जैविक और यांत्रिक नियंत्रण के तरीकों का प्रयोग करने की संस्तुति की। इसमें कृषि वानिकी, औषधीय, सगंधी पौधों, अखाद्य फसलों का उत्पादन, पर्यावरण परिवर्तन और संसाधन की कमी पर अधिक शोध से समस्याओं के हल ढूंढना आदि शामिल रहा।
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वहीं समन्वित खेती में फसल के साथ डेरी, कंपोस्ट खाद, मत्स्य पालन, बकरी/भेड़ पालन, सूकर पालन, कृषि वानिकी आदि का समावेश से छोटे और सीमांत किसानों को भोजन की पूर्ति और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना, कृषि शिक्षा को उच्च माध्यमिक शिक्षा के आवश्यक विषय के रूप में समावेश और प्रसार तंत्र सशक्त कर किसानों को लाभ पहुंचाना सम्मिलित है।

संस्तुतियों को कांग्रेस के आयोजक सचिव डॉ. बीएस महापात्र ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में देशभर के संस्थानों से 365 वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और किसान शामिल रहे। अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर एके मिश्रा ने की। वहां डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि झांसी, उत्तर प्रदेश, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
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